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Rajya Sabha Election: 4 साल के लिए बीजेपी से निकाले गए थे महेश केवट, अब राज्यसभा पहुंचने की राह लगभग साफ

MP Rajya Sabha Election 2026: महेश केवट की राज्यसभा पहुंचने की राह लगभग साफ होती दिख रही है। 2022 में भाजपा ने 4 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था, अब मध्य प्रदेश से बीजेपी के तीसरे राज्यसभा कैंडिडेट हैं।

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भारत

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Rahul Yadav

Jun 10, 2026

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MP Rajya Sabha Election 2026: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ महेश केवट (फोटो सोर्स- BJP4MP/X)

Rajya Sabha Election 2026: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की राज्यसभा पहुंचने की राह लगभग साफ होती नजर आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि महेश केवट वही नेता हैं जिन्हे बीजेपी ने 2022 में नगर निकाय चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते 4 साल के लिए निष्कासित कर दिया था।

हालांकि बाद में उनकी वापसी हुई और अब मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए भाजपा के कैंडिडेट हैं। राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी बानी हैं कि अब वह बिना किसी मुकाबले के राज्यसभा पहुंचने के लगभग करीब हैं।

कौन हैं महेश केवट?

महेश केवट मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के ओरछा क्षेत्र से आते हैं। उनका राजनीतिक और संगठनात्मक सफर चार दशक से अधिक पुराना माना जाता है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और भाजपा युवा मोर्चा में कई जिम्मेदारियां संभालीं।

संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के अलावा वे स्थानीय निकाय राजनीति में भी भूमिका निभाते रहे हैं। वर्तमान में महेश केवट मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड के अध्यक्ष हैं।

2022 में पार्टी से हुए थे निष्कासित

महेश केवट का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा है। साल 2022 के नगर निकाय चुनाव के दौरान उन पर बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ काम करने के आरोप लगे थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें चार साल के लिए निष्कासित कर दिया था।

हालांकि करीब एक साल बाद उनकी पार्टी में वापसी हो गई। वापसी के बाद उन्होंने संगठन में फिर सक्रिय भूमिका निभाई और धीरे-धीरे नेतृत्व का भरोसा दोबारा हासिल कर लिया।

बीजेपी ने क्यों बनाया तीसरा उम्मीदवार?

मध्य प्रदेश विधानसभा में संख्या बल के आधार पर बीजेपी दो सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में थी। इसके बावजूद बीजेपी ने महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाकर सभी को चौंका दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट की उम्मीदवारी केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं थी। केवट समुदाय से आने वाले महेश के जरिए बीजेपी ने पिछड़े वर्गों, निषाद और मछुआरा समुदाय को भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

नामांकन विवाद के बाद बदला पूरा समीकरण

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गया था और विधानसभा के मौजूदा गणित के हिसाब से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद पूरा चुनावी समीकरण बदल गया।

कांग्रेस ने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है और चुनाव आयोग के साथ-साथ अदालत में चुनौती देने की बात कही है। दूसरी ओर बीजेपी इसे नियमों के तहत लिया गया फैसला बता रही है।

राज्यसभा पहुंचने के करीब महेश केवट

यदि कांग्रेस को समय रहते कोई राहत नहीं मिलती, तो बीजेपी उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बढ़ जाएगी।

हालांकि, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने के फैसले को चुनाव आयोग में चुनौती देगी। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 11 जून दोपहर 3 बजे तक है। ऐसे में यदि कांग्रेस को इस अवधि के भीतर चुनाव आयोग या अदालत से कोई राहत मिलती है, तो मौजूदा चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और मुकाबला फिर से दिलचस्प हो सकता है।

फिलहाल राजनीतिक परिस्थितियां महेश केवट के पक्ष में जाती दिखाई दे रही हैं। एक समय पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बीजेपी से बाहर किए गए महेश केवट अब संसद के उच्च सदन तक पहुंचने के बेहद करीब नजर आ रहे हैं।