
NCPCR Meta Inquiry: टेक कंपनी मेटा को अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) वाले पेड विज्ञापनों को बढ़ावा देने के मामले में जांच का सामना करना पड़ रहा है। मेटा के जवाब से असंतुष्ट होकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने इस मामले में औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह जांच BBC Eye की एक रिपोर्ट के बाद शुरू की गई है, जिसमें इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट को बढ़ावा देने वाले सक्रिय विज्ञापनों और लिंक की मौजूदगी का खुलासा हुआ था।
NCPCR ने BBC Eye की रिपोर्ट पर खुद संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई 2026 को Meta को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। आयोग ने इस मामले पर कंपनी से विस्तृत और संतोषजनक जवाब मांगा था। नोटिस मिलने के एक हफ्ते बाद Meta ने अपना आधिकारिक जवाब दिया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि आयोग को सुरक्षा मानकों के बारे में Meta की दलीलें और स्पष्टीकरण अपर्याप्त लगे। इसलिए, और रिपोर्ट मांगने के बजाय आयोग ने खुद जांच करने का फैसला किया।
इधर, केंद्र सरकार ने मेटा की ग्लोबल लीडरशिप को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा की ग्लोबल टीम 5 और 6 अगस्त को भारत आ रही है ताकि सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कर सके। IT सचिव ने साफ किया कि इन बैठकों के दौरान, मेटा से अहम मुद्दों पर सीधे जवाब मांगे जाएंगे। इनमें भारतीय कानूनों का पालन, बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट को रोकने में नाकाम रहे सुरक्षा उपाय, AI से बने डीपफेक कंटेंट, और प्रधानमंत्री समेत देश की प्रमुख हस्तियों के वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट हटाए जाने जैसे मामले शामिल हैं।
Meta के खिलाफ यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सूचना प्रौद्योगिकी (IT) पर संसदीय स्थायी समिति ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को तुरंत न हटाने और हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से बिना इजाजत पोस्ट गायब होने की घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताई है। संसदीय समिति के सदस्य निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर मेटा जैसी टेक कंपनियां भारत के कड़े सुरक्षा कानूनों और बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करती रहीं, तो IT एक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें मिले सेफ हार्बर को वापस ले लिया जाएगा।