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युवाओं के आक्रोश पर NDA में कशमकश – करें, तो करें क्या? बिहार में तय नहीं कर पा रहे सहयोगी

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के Gen Z प्रदर्शन से NDA के सहयोगी असमंजस में हैं। चिराग पासवान युवाओं के समर्थन में नजर आ रहे हैं, जबकि जीतन राम मांझी खुलकर केंद्र सरकार के साथ खड़े हैं।
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Oct 12, 2026
BJP Allies on Youth Protests
Gen-Z प्रोटेस्ट को लेकर NDA में खींचतान (Photo-IANS)

NDA Allies Reaction to Gen Z Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से NDA के सहयोगी एक अजीब सी कशमकश में फंसे हुए हैं। न वह सीधे तौर पर युवाओं के प्रदर्शन को असंवैधनिक करार दे सकते हैं और न ही पूरी तरह से उसका समर्थन कर सकते हैं। खासकर, बिहार में भाजपा के सहयोगी दलों का रिएक्शन मिलाजुला है।

 CJP के बैनर तले हो रहे विरोध-प्रदर्शन में Gen Z सड़कों पर है और इसी वर्ग को रिझाने में तमाम सियासी दल लगे हुए हैं। ऐसे में अगर चिराग पासवान जैसे बीजेपी के सहयोगी प्रदर्शनकारियों को देश-विरोधी कहने वाली मानसिकता का समर्थन करते हैं, युवा विरोधी कैटेगरी में आ जाएंगे, जिसका मतलब है Gen Z वोटों से हाथ गंवाना।

Gen Z पर किस सहयोगी का क्या है रुख?

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अधिकतर सहयोगी प्रदर्शन और सरकार की कार्रवाई को लेकर खामोश हैं, और जो अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं उनके शब्द बेहद नपेतुले हैं- एक-दो को छोड़कर। बिहार में एनडीए के सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा का झुकाव युवाओं की तरफ है, लेकिन पूरी तरह सरकार के खिलाफ भी नहीं हैं।

दूसरी तरफ, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने जरूर खुलकर केंद्र का समर्थन किया है। इस मोर्चे के पार्टी संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के केवल 4 विधायक जीतकर आए थे। जीतन राम मांझी युवाओं की पसंद नहीं हैं, यह बात वह खुद भी जानते होंगे, इसलिए उन्होंने अपना स्पष्ट रखा है।

वहीं, चिराग पासवान की पार्टी के 19 विधायक हैं और वह अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुछ बड़ा हासिल करने के मिशन पर भी हैं। लिहाजा, उनके लिए युवाओं को साधना बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा का मानना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए किया जाना चाहिए।

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चिराग पासवान को भरपूर है युवा वोटों की आस

चिराग पासवान पहले ही कह चुके हैं कि भारत के युवाओं को कोई नहीं रोक सकता। जो लोग ऐसी गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं- वे कितनी ट्रेनें रोक सकते हैं, कितनी कनेक्टिविटी बाधित कर सकते हैं, कितनी सड़कें जाम कर सकते हैं? चिराग मोदी सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर हैं, लेकिन अपने पोर्टफोलियो से नाखुश चल रहे हैं। यूपी में वह कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं, ताकि केंद्र में उनका रुतबा उनके हिसाब से बढ़ सके। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है।

उनकी पार्टी यूपी में मतदाताओं से संवाद कर रही है, युवा वोटर्स पर भी पार्टी की नजर है। एक अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में करीब 15% Gen Z वोटर्स हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में 99 सीटों पर जीत और हार का अंतर 10 हजार से भी कम रहा था। ऐसे में युवा कई सीटों के परिणाम प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि चिराग पासवान सरकार के साथ की कीमत पर युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं जा रहे। सरकार में होते हुए भी प्रदर्शनकारियों के पक्ष में बयान देकर चिराग Gen Z पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश में हैं। 

जीतन राम मांझी पूरी तरह से खड़े हैं सरकार के साथ

उधर, केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) प्रमुख जीतन राम मांझी पूरी तरह से सरकार के साथ हैं। X पर उन्होंने लिखा है- भारत शेरों की धरती है। भारत माता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे शेर पैदा किए हैं, जो न तो कॉकरोच से डरते हैं और न ही झींगुरों से। वे जानते हैं कि उनसे कैसे निपटना है। बिहार में एनडीए के दूसरे सहयोगियों के विपरीत मांझी का स्टैन्ड एकदम साफ है। इसकी सबसे प्रमुख वजह है – आत्मज्ञान।

मांझी जानते हैं कि वह युवा वर्ग को साध नहीं सकते, उनकी राजनीति, युवाओं की पसंद की राजनीति से एकदम अलग है। यूपी में कुछ पाने की उनकी कोई इच्छा, बिहार में जितना है उससे वह संतुष्ट हैं। केंद्र सरकार में मंत्री पद मिला हुआ है, वह सरकार के शुक्रगुजार हैं और प्रदर्शनकारियों के प्रति दिल में सिंपथी रखकर उसे नाराज नहीं करना चाहते।

Updated on:
12 Oct 2026 02:54 pm
Published on:
12 Oct 2026 02:17 pm