
NEET Exam Controversy: तमिलनाडु विधानसभा में NEET परीक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया। नीट की वजह से अपनी जान गंवाने वाली 17 वर्षीय मेडिकल अभ्यर्थी एस. अनिता की पुण्यतिथि के अवसर पर सदन में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। हालांकि, अनिता की याद में आयोजित होने वाले एक सार्वजनिक स्मृति कार्यक्रम की अनुमति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली।
एस. अनिता तमिलनाडु के अरियालुर जिले के ग्रामीण इलाके की एक मेधावी छात्रा थी। साल 2017 में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 1,200 में से 1,176 अंक और 196.75 का कट-ऑफ हासिल करने के बावजूद, NEET में कम अंक आने के कारण उसे एमबीबीएस की सीट नहीं मिल सकी थी। सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने के बाद 1 सितंबर 2017 को उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के बाद पूरे राज्य में NEET को हटाने के लिए बड़ा आंदोलन शुरू हो गया था।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में मुद्दा उठाया कि अनिता की पुण्यतिथि पर छात्रों द्वारा बेसेंट नगर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को सरकार ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अनिता के भाई ने भी उनसे मुलाकात कर इस कार्यक्रम की अनुमति की मांग की थी। स्टालिन ने सवाल किया कि जो सरकार हमेशा NEET का विरोध करती रही है, वह अनिता को श्रद्धांजलि देने वाले कार्यक्रम को क्यों रोक रही है।
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री आधव अर्जुन ने बताया कि धार्मिक त्योहारों के चलते बेसेंट नगर में अत्यधिक भीड़ जुटने की आशंका थी, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, विपक्ष के नेता ने तर्क दिया कि चर्च का उत्सव समाप्त हो चुका है और इलाके में कोई भीड़ नहीं है। इस पर मंत्री आधव अर्जुन ने आश्वासन दिया कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों की भावना समझती है और श्रद्धांजलि कार्यक्रम के लिए तुरंत किसी दूसरी जगह की व्यवस्था करेगी।
सदन में बहस के दौरान मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रियों ने समय-समय पर NEET के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए हैं, लेकिन केंद्र सरकार राज्य की मांग को लगातार नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक यह स्थिति बदलेगी और राज्य नीट को खत्म करने के अपने संकल्प पर कायम रहेगा।