
NEET UG Paper Leak Case: NEET UG पेपर लीक और गड़बड़ी के मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 11 जुलाई तक बढ़ा दिया है। सभी आरोपियों को आज (सोमवार) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी मौजूदा हिरासत समाप्त होने के बाद यह निर्णय सुनाया गया।
इस मामले में अदालत ने 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया है। जिन आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है, उनमें यश यादव, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, धनंजय लोखंडे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, मनीषा हवलदार और डॉ. मनोज शिरुरे शामिल हैं। इन सभी आरोपियों की पहले की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद मामले की जांच और आगे की पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया।
इस मामले में इससे पहले भी दो अन्य प्रमुख आरोपियों, पीवी कुलकर्णी (PV Kulkarni) और शिवराज मोटेगावंकर (Shivraj Motegavankar) की न्यायिक हिरासत बढ़ाई जा चुकी थी। दोनों आरोपियों को 24 जून को अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 8 जुलाई तक बढ़ाने का आदेश दिया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, पीवी कुलकर्णी को इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया गया है। वह लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर हैं और लंबे समय तक प्रश्नपत्र निर्माण से जुड़े पैनल का हिस्सा रह चुके हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा प्रणाली का दुरुपयोग करते हुए पुणे स्थित कोचिंग नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर लीक किए। वहीं शिवराज मोटेगावंकर पर आरोप है कि उन्हें परीक्षा से करीब 10 दिन पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तर मिल गए थे। इसके बाद कथित तौर पर इसे कोचिंग सेंटर और छात्रों तक पहुंचाया गया। इसके अलावा, जांच में मनीषा मंदारे का नाम भी सामने आया है, जिनके माध्यम से पेपर लीक नेटवर्क को संचालित करने की बात कही जा रही है।
NEET-UG 2026 एग्जाम 3 मई को देशभर के परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। हालांकि पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। बाद में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने इसे 21 जून को दोबारा सख्त सुरक्षा और निगरानी के बीच आयोजित किया। इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।