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कैदियों के पुनर्वास की नई पहल, इस राज्य में पूर्व-रिलीज और पोस्ट-रिलीज काउंसलिंग की योजना शुरू

तमिलनाडु सरकार ने जेल में सजा काट चुके कैदियों को पूर्व-रिलीज और पोस्ट-रिलीज रिवाइजेशन काउंसलिंग प्रदान की जाएगी।
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Aug 31, 2025
Prisoner Counceling
कैदियों के लिए काउंसलिंग (AI Generated Image)

तमिलनाडु सरकार 1 सितंबर, 2025 से एक अभूतपूर्व पायलट योजना शुरू करने जा रही है, जिसके तहत तीन साल या उससे अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके कैदियों को पूर्व-रिलीज और पोस्ट-रिलीज रिवाइजेशन काउंसलिंग प्रदान की जाएगी। भारत में अपनी तरह की पहली इस पहल का उद्देश्य कैदियों का समाज में सहज पुनर्वास सुनिश्चित करना और पुनरपराध (रिसिडिविज्म) के जोखिम को कम करना है।

TNDPS के माध्यम से लागू होगी योजना

यह योजना तमिलनाडु डिस्चार्ज्ड प्रिजनर्स एड सोसाइटी (TNDPS) के माध्यम से लागू की जाएगी, जिसमें राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (SMHA) द्वारा मान्यता प्राप्त योग्य नैदानिक मनोवैज्ञानिकों का सहयोग लिया जाएगा। जेलों और सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक, महेश्वर दयाल ने बताया कि इस पायलट योजना की निगरानी इसके प्रभाव का आकलन करने और आवश्यक संशोधनों के लिए की जाएगी।

पहले चरण में 350 कैदियों को मिलेगी काउंसलिंग

पहले चरण में, 1 सितंबर से शुरू होकर अगले चार महीनों में लगभग 350 कैदियों को शामिल किया जाएगा, जो जल्द ही रिहा होने वाले हैं। प्रत्येक कैदी को तीन काउंसलिंग सत्र प्रदान किए जाएंगे। एक रिहाई से पहले और दो रिहाई के बाद। ये सत्र कैदियों को जेल के बाहर की चुनौतियों, जैसे सामाजिक कलंक, परिवार से समर्थन की कमी और रोजगार की समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार करेंगे।

800 से अधिक मनोवैज्ञानिक होंगे शामिल

अधिकारियों के अनुसार, 800 से अधिक SMHA-मान्यता प्राप्त मनोवैज्ञानिक इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं। प्रत्येक सत्र की लागत 1,000 रुपये होगी, जिससे प्रति कैदी कुल परामर्श लागत 3,000 रुपये होगी। जेल मनोवैज्ञानिक उन कैदियों की भी पहचान करेंगे, जिन्हें प्रारंभिक सत्रों से परे दीर्घकालिक सहायता की आवश्यकता हो सकती है।

10 लाख रुपये का प्रारंभिक बजट

राज्य सरकार ने इस पायलट योजना के लिए 10 लाख रुपये का बजट आवंटित किया है। अधिकारियों ने बताया कि जेल के भीतर दी जाने वाली काउंसलिंग जेल से संबंधित समस्याओं पर केंद्रित होती है, जबकि रिहाई के बाद कैदियों को सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह नई काउंसलिंग सेवा इन कमियों को दूर करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

विशेषज्ञों ने की सराहना

विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के सेंटर फॉर क्रिमिनोलॉजी एंड जस्टिस के प्रोफेसर विजय राघवन ने इसे एक अग्रणी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना विशेष रूप से महिला कैदियों के लिए फायदेमंद होगी, जो रिहाई के बाद सामाजिक कलंक का सामना करती हैं।

Updated on:
31 Aug 2025 01:07 pm
Published on:
31 Aug 2025 01:07 pm