
human Trafficking: कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का खुलासा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से किया गया है। इस मामले में बिहार की राजधानी पटना की स्पेशल एनआईए अदालत में जांच एजेंसी ने पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले की जांच जारी है, जबकि गिरोह का सरगना फरार है।
NIA जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी बेहद ही संगठित तरीके से मानव तस्करी चला रहे थे। बेहतर भविष्य और नौकरी का लालच देकर वे भारतीय युवाओं को कंबोडिया ले जाते थे। इसके बाद वे इन युवाओं को अवैध रूप से संचालित साइबर धोखाधड़ी वाली कंपनियों में काम करने को मजबूर करते थे।
NIA की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ये युवा किसी भी हाल में भारत वापस नहीं लौट सकें, इसलिए कंबोडिया पहुंचने पर पीड़ितों का पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता था। इतना ही नहीं, यदि कोई शख्स साइबर धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों में काम करने से मना करता या विरोध करता तो उसे मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता था।
NIA की जांच में यह भी पता चला कि आनंद कुमार गिरोह का सरगना है। भारत में रहने वाले अपने एजेंटो और ट्रैवल एजेंटो के जरिए आनंद कुमार भोले-भाले युवाओं को अपने जाल में फंसाता था और सुनहरे भविष्य का सपना देकर कंबोडिया बुलता था। इसके बाद कंबोडिया में बैठक अपने सहयोगियों की मदद से युवाओं की तस्करी करते थे। मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी एक भारतीय युवक को कंबोडिया की फर्जी कंपनी को बेचने के बदले 2000 से 3000 अमेरिकी डॉलर तक वसूलते थे।
फरवरी में मुख्य आरोपी आनंद कुमार समेत पांच में से 3 आरोपियों को कंबोडिया से दिल्ली लौटने पर गिरफ्तार कर लिया गया था। पकड़े गए ये तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश निवासी अभय नाथ दुबे, बिहार निवासी अभिरंजन कुमार और उत्तर प्रदेश निवासी रोहित यादव हैं। पांचवां आरोपी, प्रहलाद कुमार सिंह, जो अभी जमानत पर बाहर है।फिलहाल गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय साजिश में शामिल लोगों को बेनकाब करने के NIA के प्रयास जारी है।