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BIT Mesra के पढ़े हैं निशांत, दो साल तक किसी को पता नहीं था कि नीतीश के बेटे हैं

निशांत ने अपनी पढ़ाई पटना के सेंट कैरन स्कूल से शुरू की, फिर मुसूरी के मनावा भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल में की। बाद में उन्होंने रांची के निकट बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।

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Mar 04, 2026
नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार

Nishant Kumar: बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार, जिन्हें परिवार और दोस्त 'निशी' कहकर पुकारते हैं, अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले हैं। 20 जुलाई, 1975 को जन्मे निशांत की मां मंजू सिन्हा एक स्कूल टीचर थीं, जिन्होंने नीतीश के राजनीति में व्यस्त रहने के कारण उन्हें अकेले पाला। मां की 2007 में निधन के बाद निशांत ने कम प्रोफाइल रखा और राजनीति से दूरी बनाए रखी।

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निशांत कुमार की पढ़ाई-लिखाई

निशांत ने अपनी पढ़ाई पटना के सेंट कैरन स्कूल से शुरू की, फिर मुसूरी के मनावा भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल में की। बाद में उन्होंने रांची के निकट बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। BIT मेसरा में उनके दोस्तों में इस्लामपुर विधायक रुहैल रंजन (पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन के बेटे), अश्विनी कुमार चौबे के बेटे अरजीत शशवत, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के भाई राजेश चौधरी और पूर्व सिक्किम गवर्नर गंगा प्रसाद के बेटे अमित चौरसिया शामिल थे।

दो साल तक पता नहीं चला कि नीतीश कुमार के बेटे

BIT में पहले दो साल तक किसी को पता नहीं चला कि वे नीतीश कुमार के बेटे हैं। दोस्त रुहैल रंजन ने कहा, 'पहले दो साल तक कोई नहीं जानता था कि वह नीतीश कुमार के बेटे हैं।' निशांत ने पढ़ाई के दौरान भी कम प्रोफाइल रखा और राजनीति से दूर रहे। परिवार के करीबी बताते हैं कि वे आध्यात्मिक झुकाव रखते हैं। ओशो, समाजवाद, समकालीन बिहार, RSS से जुड़ी किताबें और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ते हैं। पिता नीतीश की तरह ही उनमें आध्यात्मिक रुचि है—नीतीश ने इंजीनियरिंग के बाद ओशो पढ़ा था, निशांत भी भारतीय और विदेशी रहस्यमयी साहित्य पढ़ते हैं।

राजनीति से रहे दूर

वे जल-जीवन-हरियाली मिशन (2019) का गहन अध्ययन करते हैं और शासन से जुड़े मुद्दों पर नजर रखते हैं। हालांकि, 2017 में उन्होंने कहा था कि राजनीति में कोई रुचि नहीं है, लेकिन अब जेडीयू कार्यकर्ताओं की मांग पर वे सक्रिय हो रहे हैं। हाल की रिपोर्ट्स में निशांत को राज्यसभा भेजने की चर्चा जोरों पर है। बिहार से पांच राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं (अप्रैल 2026 में चुनाव)। जादुई संख्या 41 है। जेडीयू के 85 और बीजेपी के 89 विधायक हैं, जिससे दोनों को दो-दो सीटें मिलना तय है। पांचवीं सीट के लिए एनडीए के पास 38 वोट हैं, तीन और चाहिए।

दो सीटों पर दावा कर रही है जेडीयू

जेडीयू दो सीटों पर दावा कर रही है-रामनाथ ठाकुर एक पर लगभग तय हैं, दूसरी पर निशांत या नीतीश का नाम चर्चा में है। कई जेडीयू नेता निशांत को पार्टी में शामिल होने की घोषणा जल्द करने की बात कह रहे हैं। कुछ सूत्रों के मुताबिक, नीतीश खुद राज्यसभा जा सकते हैं और निशांत डिप्टी सीएम बन सकते हैं, जबकि बीजेपी से मुख्यमंत्री बनेगा। हालांकि, निशांत खुद राजनीतिक पद से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन पार्टी की मांग मजबूत है।

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