
सायनी घोष के TMC के बागी सांसदों को समर्थन देने की चर्चा तेज (Photo-IANS)
Saayoni Ghosh Rebel: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। विधायकों में टूट के बाद अब सांसदों में भी टूट की खबरें सामने आ रही है। पार्टी के करीब 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में अलग व्यवस्था देने की मांग की है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों में ममता बनर्जी की करीबी सायानी घोष का नाम भी शामिल है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सायानी घोष ने बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले गुट को समर्थन दे दिया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान काबा-मदीना गाना गाकर चर्चाओं में आई थी। इस पर बीजेपी ने नाराजगी जाहिर की थी और मुस्लिम तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया था।
जानकारी के मुताबिक, सायोनी घोष ने काकोली घोष दस्तीदार से संपर्क कर बागी खेमे के प्रति अपना समर्थन जताया और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी अपने सबसे बड़े आंतरिक विद्रोहों में से एक का सामना कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सायोनी घोष को लगता है कि टीएमसी में उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हुए हमलों के समय पार्टी नेतृत्व से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने से वह बेहद नाराज थीं।
बताया जा रहा है कि उस कठिन दौर में उन्होंने खुद को पार्टी के भीतर अकेला महसूस किया। इतना ही नहीं, उन्हें अपना चुनाव प्रचार अभियान बीच में ही सीमित करने के लिए भी कहा गया था, जिससे उनकी असंतुष्टि और बढ़ गई।
टीएमसी की एक और राज्य सभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। कयास लगाए जा रहे है कि देव बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्य सभा सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले राज्य सभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी और सांसद पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी के अंदर खलबली मच गई। पार्टी के कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने विधायकों को तोड़ लिया। करीब 58 विधायकों ने ऋतब्रत को अपना समर्थन दिया और हस्ताक्षर किया हुआ पत्र स्पीकर को सौंपा। इसके बाद स्पीकर ने ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष के लिए मान्यता दी। वहीं अब सांसदों में भी टूट की संभावना जताई जा रही है।
Updated on:
10 Jun 2026 02:11 pm
Published on:
10 Jun 2026 01:40 pm
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
