'नो मनी फॉर टेरर' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में हो रहा है। पीएम मोदी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया। और आंतकवाद के खिलाफ जमकर बोले, कहाकि, हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक आतंकवाद का खात्मा नहीं हो जाता। पाकिस्तान को भी इशारों में चेताया।
नई दिल्ली में आतंकी फंडिंग के खिलाफ दो दिनी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नो मनी फॉर टेरर का उद्घाटन करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहाकि, हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक आतंकवाद का खात्मा नहीं हो जाता। लंबे समय से आतंकवाद का असर गरीबों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। चाहे वह पर्यटन हो या व्यापार का क्षेत्र। कोई भी आतंकवाद वाले इलाके को पंसद नहीं करता है। लोगों की रोजी-रोटी छिन रही है। सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि, हम आतंकवाद के वित्तपोषण की जड़ पर प्रहार करें। पीएम मोदी ने ऐलान किया कि, आतंकवाद के मददगारों की पहचान जरूरी है।
नो मनी फॉर टेरर का तीसरा सम्मेलन
'नो मनी फॉर टेरर' अंतरराष्ट्रीय मंत्रीस्तरीय सम्मेलन में दुनिया के 72 देशों व छह संस्थाओं के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया और शनिवार को गृहमंत्री अमित शाह समापन सत्र को संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन 2018 में पेरिस और 2019 में मेलबर्न में हुआ था।
हमने आतंकवाद का बहादुरी से किया सामना
'नो मनी फॉर टेरर' सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह बड़ी बात है कि यह सम्मेलन भारत में हो रहा है। दशकों तक हमारे देश को आतंकवाद ने चोट पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन हमने बहादुरी से इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी।
आतंकवाद को हराने के लिए एकजुटता जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आतंकवाद मानवता, स्वतंत्रता और सभ्यता पर हमला है। यह किसी भी देश की सीमा को नहीं पहचानता है। अगर आतंकवाद को हराना है तो हमें एकजुटता और शून्य-सहनशीलता का दृष्टिकोण अपनाना होगा।
आतंकवादी संगठनों को कई स्रोतों से प्राप्त होता है धन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह सभी जानते हैं कि आतंकवादी संगठनों को कई स्रोतों से धन प्राप्त होता है। इसका एक स्रोत किसी एक देश का समर्थन भी है। कुछ देश अपनी विदेश नीतियों के तहत आतंकवाद का समर्थन करते हैं। वे उन्हें राजनीतिक, वैचारिक और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
संगठित अपराधियों के आतंकी संगठनों से गहरे रिश्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आतंकी फंडिंग के स्रोतों में से एक संगठित अपराध है। इसे अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। इन गिरोहों के अक्सर आतंकी संगठनों से गहरे संबंध होते हैं।