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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में LoC पर लैंडमाइन ब्लास्ट, JCO समेत चार जवान घायल

राजौरी के नौशेरा सेक्टर में LoC के पास एरिया डोमिनेशन पेट्रोल के दौरान लैंडमाइन विस्फोट में एक JCO समेत चार जवान घायल हो गए। वहीं सुंदरबनी सेक्टर में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन दिखने के बाद सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन भी चलाया।

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भारत

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Himadri Joshi

Jun 16, 2026

Four soldiers injured in landmine blast in Rajouri.

राजौरी में लैंडमाइन विस्फोट में चार जवान घायल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास मंगलवार को एक लैंडमाइन विस्फोट में सेना के चार जवान घायल हो गए। यह घटना नौशेरा सेक्टर के अग्रिम कलाल इलाके में हुई, जहां सेना की एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग चल रही थी। सीमा पार से लगातार घुसपैठ और ड्रोन गतिविधियों के कारण यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील बना हुआ है। इसी दौरान गलती से एक लैंडमाइन सक्रिय हो गई और जोरदार धमाका हुआ। इस हादसे में एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) और तीन अन्य जवान घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी जवानों का इलाज जारी है और इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

घुसपैठ रोकने के लिए बिछाई जाती है यह लैंडमाइन

सेना के अधिकारियों के मुताबिक, अग्रिम इलाकों में घुसपैठ रोकने के लिए बड़ी संख्या में लैंडमाइन बिछाई जाती हैं। बारिश और भूस्खलन के दौरान कई बार ये माइन अपनी मूल जगह से बहकर दूसरी जगह पहुंच जाती हैं। ऐसी लैंडमाइन को ड्रिफ्ट माइन कहा जाता है। सुरक्षा बलों की पेट्रोलिंग के दौरान अधिकतर हादसे इन्हीं ड्रिफ्ट माइन के कारण होते हैं। राजौरी और पुंछ सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई हादसे सामने आ चुके हैं। सेना लगातार इन क्षेत्रों में निगरानी और माइन डिटेक्शन अभियान चला रही है ताकि जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन भी देखा गया

घटना के बीच मंगलवार को ही राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन भी देखा गया। यह ड्रोन महादेव गैप और कलाल गांव के बीच अग्रिम क्षेत्रों में नजर आया। ड्रोन की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने तुरंत घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। हालांकि तलाशी के दौरान कोई हथियार, नशीला पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान बरामद नहीं हुआ। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार बैठे आतंकी हैंडलर ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद, नकदी और ड्रग्स भेजने की कोशिश करते हैं। इन सामग्रियों को स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के जरिए आतंकियों तक पहुंचाया जाता है।

हाई-टेक एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए

भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सीमा पर ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए हाई-टेक एंटी ड्रोन उपकरण तैनात किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन आधुनिक सिस्टम के इस्तेमाल के बाद सीमा पार से ड्रोन भेजे जाने की घटनाओं में कमी आई है। इसके बावजूद नौशेरा, मंजाकोट और तेरयाथ जैसे क्षेत्रों में सेना लगातार सतर्क बनी हुई है। LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा बल नियमित निगरानी, पेट्रोलिंग और जवाबी कार्रवाई के जरिए घुसपैठ तथा आतंकवाद को रोकने में जुटे हैं।

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