यूपी के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जल्द ही देश-विदेश के लिए विमान टेकऑफ करेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को DGCA से एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है। एयरपोर्ट पर मालवाहक एवं देश-विदेश के लिए उड़ाने कब शुरू होंगी, आइए जानते हैं।
Noida International Airport Get DGCA Approval: उत्तर प्रदेश के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट घरेलू व विदेशी उड़ानों के संचालन के लिए तैयार हो गया है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उड़ानों के संचालन के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation) ने एयरोड्रम लाइसेंस (हवाई अड्डा लाइसेंस) दे दिया है। DGCA का लाइसेंस मिलने के बाद एयरपोर्ट के उद्घाटन का रास्ता साथ हो गया है। PM नरेंद्र मोदी नवरात्रि में इस एयरपोर्ट का शुभारंभ कर सकते हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला एयरोड्रम लाइसेंस प्रमाणित करता है कि यह एयरपोर्ट नियामक द्वारा निर्धारित सुरक्षा और परिचालन मानकों को पूरा करता है।
सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि इस हवाई अड्डे को सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के तहत सभी मौसमों में संचालन के लिए लाइसेंस प्राप्त है। इसमें 10/28 दिशा वाला 3,900X45 मीटर का रनवे है, जो इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और एयरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (AGL) सिस्टम से लैस है। इसलिए एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन 24X7 संभव है। इस हवाई अड्डे पर 24 कोड C और 2 कोड D/F विमानों के लिए पार्किंग स्टैंड हैं। यह ARFF श्रेणी 9 की सुविधाओं से सुसज्जित है, जो बोइंग 777-300ER जैसे बड़े आकार के विमानों को संभालने में सक्षम है।
DGCA से एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मालवाहक एवं घरेलू उड़ानें 45 दिनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के नोडल ऑफिसर और YEIDA के ACEO शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि एयरोड्रम लाइसेंस शुक्रवार को DGCA ने जारी किया है। लाइसेंस मिलने के बाद एयरपोर्ट के उद्घाटन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। करीब 45 दिन बाद 20 अप्रैल तक यहां विमानों का संचालन शुरू हो जाएगा। यहां से 3 एयरलाइंस इंडिगो, आकाश और एयर इंडिया एक्सप्रेस पैसेंजर फ्लाइट शुरू करेंगी।
बता दें कि इस हवाई अड्डे का विकास 4 चरणों में एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ किया जा रहा है। पहले चरण में, एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ, हवाई अड्डे की वार्षिक क्षमता लगभग 12 मिलियन यात्रियों को संभालने की होगी। सभी चरणों के पूरा होने पर, एयरपोर्ट प्रति वर्ष 70 मिलियन यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इस क्षमता के आधार पर नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में उभरेगा।
यह एयरपोर्ट आधुनिक तकनीकि, कनेक्टिविटी और बेहद मजबूती के साथ बनाया गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। यह 11,750 एकड़ भूमि पर बना है। इस एयरपोर्ट पर मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी (Multimodal Connectivity) है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़ा है। यह इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के साथ-साथ मेट्रो और हाई-स्पीड रेल लिंक (रैपिड रेल) के माध्यम से जुड़ेगा। इसके साथ ही एयरपोर्ट पर डिजिटल-फर्स्ट और पेपरलेस व्यवस्था पर जोर दिया गया है। यहां बायोमेट्रिक-आधारित चेक-इन, सिक्योरिटी और बोर्डिंग की व्यवस्था होगी।