
Government Action on NTA: नीट यूजी 2026 समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने एनटीए यानि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने एनटीए के 47 अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही जिन अधिकारियों की भूमिका गंभीर लापरवाही या अनियमितताओं में सामने आई है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस फैसले के बाद एनटीए में हड़कंप मच गया है।
सरकार सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। सूत्रों के मुताबिक, अगले महीने NTA का बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया जाएगा। एजेंसी की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रबंधन और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए जाएंगे। यह पूरा सुधार कार्यक्रम उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर लागू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाना है।
NTA में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एजेंसी ने भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। भर्ती UPSC के प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इसके तहत 4 वरिष्ठ जनरल मैनेजर और 16 युवा प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा निदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर के नए पद भी जल्द भरे जाएंगे ताकि एजेंसी की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत किया जा सके।
संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, NTA में स्वीकृत 39 स्थायी पदों में से फिलहाल केवल 24 पदों पर ही अधिकारी कार्यरत हैं जबकि 15 पद खाली हैं। एजेंसी के कामकाज के लिए 73 संविदा कर्मचारी और 124 आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। इनमें कंसल्टेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपर और यंग प्रोफेशनल्स शामिल हैं। सरकार का मानना है कि नियमित नियुक्तियों से एजेंसी की कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय में भी प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया है। उनकी जगह नरेश कुमार गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है, जबकि टी. के. अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसा बहाल करना है।
इससे पहले केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए सख्त प्रावधानों वाले विधेयक को मंजूरी दे चुकी है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता से समझौता करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।