
US strikes Iran: पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों की सैन्य कार्रवाई से ना केवल शांति की उम्मीदों को करारा झटका दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले कच्चे तेल के बाजार में भी आग लगा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस टकराव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz), के जल्द खुलने की संभावनाएं धुंधली हो गई हैं, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और होर्मुज स्ट्रेट फिर से बंद आशंका का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में 78 सेंट यानी 1% की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह 78.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल के भाव में 74 सेंट यानी 1.01% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद यह 74.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर असर डाल सकती है, जबकि आयात लागत बढ़ने की चिंता भी बाजार पर प्रभाव डालेगी।
आपको बता दें कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार देर रात बयान जारी करते हुए कहा, 'भारत पश्चिम एशिया में हाल के हमलों और बढ़ते तनाव को लेकर बहुत चिंतित है। ये घटनाएं तब हुई हैं जब इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को फिर से निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं से क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो सकता है।'
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में 25 मई से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। आखिरी बार सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपए प्रति लीटर, जबकि डीजल की कीमतों में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
चूंकि भारत 85 फीसदी तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ता है। यदि इसी रफ्तार से तेल की कीमतें बढ़ती रही तो आगामी दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।