स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद विशाल तेल टैंकर जहाज चर्चा में हैं। इसी मार्ग से दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। जानिए तेल टैंकरों का इतिहास, उनकी क्षमता, वीएलसीसी जहाजों की खासियत और एक बैरल क्रूड ऑयल से पेट्रोल, डीजल व अन्य उत्पाद कैसे बनते हैं।
VLCC Very Large Crude Carrier: फारस की खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद समंदर की लहरों पर चलने वाले भीमकाय व विशाल तेल टैंकर जहाज (कार्गो शिप) इन दिनों चर्चा में हैं। इस संकीर्ण रास्ते से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत और प्राकृतिक (गैस ब्लैक गोल्ड) का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत समेत पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति इसी पर निर्भर है। यह क्रूड विशालकाय टैंकरों के जरिए ही परिवहन होता है। क्रूड ऑयल परिवहन करने वाले ये टैंकर अपनी बनावट, क्षमता व परिवहन को लेकर हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं। इन टैंकरों की सरंचना इन तथ्यों से समझ सकते हैं।
पैमाना : एक स्टैंडर्ड ऑयल बैरल में 42 यूएस गैलन यानी लगभग 159 लीटर
एक बैरल को रिफाइनरी में प्रोसेस करने पर लगभग 44 से 45 गैलन पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स मिलते हैं।
एक बैरल = उत्पादों का ब्रेकडाउन
गैसोलीन (पेट्रोल) : 19-20 गैलन (लगभग 45 प्रतिशत) – कारों, बाइक्स का ईंधन।
डीजल/डिस्टिलेट फ्यूल (हीटिंग ऑयल सहित) : 10-13 गैलन (लगभग 30 प्रतिशत) – ट्रक, बस, ट्रेन, हीटिंग के लिए।
जेट फ्यूल/केरोसिन: 3-4 गैलन (लगभग 10 प्रतिशत) – हवाई जहाजों के लिए।
हाइड्रोकार्बन गैस लिक्विड्स (एचजीएलएस जैसे प्रोपेन, ब्यूटेन): 1-2 गैलन (लगभग 5 प्रतिशत) – एलपीजी सिलेंडर, इंडस्ट्री।
अन्य 10 प्रतिशत : रेसिड्यूअल फ्यूल ऑयल, एस्फाल्ट (सड़क निर्माण), लुब्रिकेंट्स (इंजन ऑयल), पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक, पेट्रोलियम कोक, सल्फर आदि।