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मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की तैयारी: 200 से अधिक सांसदों ने प्रस्ताव पर किए साइन

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों ने SIR (Special Intensive Review) के तहत भेदभाव करने और बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था। अब विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद के हटाने की तैयारी की है।

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Mar 12, 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Photo- EC 'X')

कांग्रेस सहित 'I.N.D.I.A' ब्लॉक के कई विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की तैयारी की है। विपक्षी दलों के सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव पर साइन कर लिए हैं। यह प्रस्ताव को शुक्रवार को सदन में पेश हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों सहित 200 से अधिक सदस्यों ने साइन किए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव को किस सदन में पेश किया जाएगा।

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ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए AAP के सांसदो ने भी किए साइन

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर गठबंधन 'I.N.D.I.A' के अलावा AAP के सांसदों ने भी साइन किए हैं। हालांकि, AAP गठबंधन 'I.N.D.I.A' का हिस्सा नहीं है। यह भारत के इतिहास में पहली बार है, जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह का नोटिस दिया गया है।

ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हटाने के लिए तैयार किए गए नोटिस में विपक्षी दलों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी में हुई धांधली की जांच में बाधा बनना और बड़े पैमाने पर वोटर्स को उनके अधिकार से वंचित करने का आरोप है। मुख्य चुनाव आयुक्त पर पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में पक्षपात करने का आरोप है।
पश्चिम बंगाल की CM और TMC की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर SIR के तहत वास्तविक मतदाताओं का नाम हटाने का आरोप लगाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के साइन जरूरी होते हैं। नोटिस स्वीकार होने पर 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की जाती है। यह समित आरोपों की जांच करती है।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की हटाने वाली प्रक्रिया के समान है। यह केवल आरोप सिद्ध होने या अक्षमता के आधार पर ही संभव है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। यह पारित होने के लिए विशेष बहुमत आवश्यक है। सदन के कुल सदस्य की संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत दोनों सदनों में पारित होने पर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का आदेश राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाता है।

पश्चिम बंगाल में कितने वोटर्स के नाम काटे गए?

पश्चिम बंगाल में SIR के बाद 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हुई थी। इसके अनुसार, राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या में 8% (61 लाख नाम) कमी आई है। पश्चिम बंगाल में पंजीकृत मतदाताओं में से 60.06 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची में था, लेकिन उनके नाम पर विचाराधीन की मुहर लगी थी। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों के नाम के आगे विचाराधीन की मुहर लगी है। ऐसे लोग आगामी विधानसभा चुनावों में तब तक अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्त न्यायिक अधिकारी उनके मामलों की समीक्षा नहीं कर लेते है। इसके बाद ही उन्हें वोट का अधिकार मिलेगा।

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