राष्ट्रीय

पंजाब को उबालने की स्क्रिप्ट तैयार, संविधान दिवस पर मोदी सरकार को सीधी चुनौती, पत्रिका की रिपोर्ट में निकला सच

किसान संगठन 26 नवंबर को चंडीगढ़ में प्रदर्शन करेंगे और इस बार उनके साथ छात्र तथा बिजली कर्मचारी भी जुड़े हैं। आंदोलन को एमएसपी से आगे बढ़ाकर ‘पंजाब बचाओ’ और अस्मिता के मुद्दों से जोड़ा गया है। गांवों और विश्वविद्यालयों में माहौल गरम है। संसद सत्र से ठीक पहले आंदोलन की टाइमिंग रणनीतिक मानी जा रही है। पढ़ें पत्रिका संवाददाता विकास सिंह की ग्राउंड रिपोर्ट

2 min read
Nov 25, 2025
पंजाब में फिर से आंदोलन की तैयारी (फोटो-पत्रिका)

Patrika Ground Report: केंद्र सरकार के खिलाफ पंजाब को एक बार फिर उबालने की अंदरखाने तैयारी है। पांच साल पहले किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली में आंदोलन की अगुवाई कर चुके किसान संगठन एक बार फिर ठीक उसी 26 नवंबर, संविधान दिवस को प्रदर्शन करेंगे, लेकिन इस बार दिल्ली में नहीं बल्कि चंडीगढ़ में और निशाने पर केंद्र सरकार की होगी।

ये भी पढ़ें

दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन: शिक्षा की आड़ में ‘आतंक’ का अड्डा! फर्जी नैक ग्रेड का पर्दाफाश

इस बार किसानों ने छात्रों और बिजली कर्मचारियों को साधा

खास बात यह है कि इस बार किसान अकेले नहीं बल्कि उन्होंने छात्रों और बिजली कर्मचारियों को भी साथ लेकर इसे पंजाब की अस्मिता से जोड़कर आंदोलन की रणनीति बनाई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं, लेकिन गांव-गांव में खेतों-दफ्तरों और कॉलेजों में 'चलो चंडीगढ़' का आह्वान किया जा रहा है।

पत्रिका संवाददाता ने की पड़ताल

पत्रिका के संवाददाता ने चंडीगढ़-मोहाली के आसपास करीब एक दर्जन गांवाें का दौरा कर पड़ताल की तो यह कहानी और उसके पीछे पंजाब को उबालने की योजना सामने आई। पड़ताल में सामने आया कि वामपंथी नेतृत्व वाले किसानों-कर्मचारियों व छात्र संगठनों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर लड़ाई को मांगों से ज्यादा 'वैचारिक जंग' बना दिया है।

संघ का बायकॉट करने का प्लान

आंदोलन के रणनीतिकारों ने वार-रूम में तय किया गया है कि दिल्ली की सत्ता के प्रतीक 'राइट विंग' को पंजाब से पूरी तरह 'बॉयकॉट' करना है। पंजाब यूनिवर्सिटी में मुर्दाबाद के लिखे स्लोगन इसके सबूत हैं। यूनिवर्सिटी छात्र गगन का कहना है कि विद्यार्थियों और किसानों ने आरएसएस, बीजेपी और एवीबीपी को आंदोलन से पूरी तरह बैन किया है। इनको यहां एंट्री नहीं है।

इमोशनल कार्ड: एमएसपी से आगे ‘पंजाब बचाओ’ का दांव

पहले आंदोलन कर चुके संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के नेताओं ने बातचीत में माना है कि केवल किसानों के एमएसपी के मुद्दे पर अब पूरे पंजाब को 2020 की तरह लामबंद नहीं किया जा सकता। इसलिए स्टूडेंट्स और कर्मचारियों के साथ आम जनता को जोड़ने के लिए चंडीगढ़ पर पंजाब का हक, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में सदस्य बढ़ाकर पंजाब का प्रभुत्व कम करने और पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट का चुनाव नहीं करवाकर केंद्र के दखल के मुद्दे जोड़कर आंदोलन में 'पंजाबी अस्मिता' या 'पंजाब बचाओ' का इमोशनल कार्ड खेला जा रहा है।

किसानों के गुस्से को दी हवा…

पंजाब के गांवों में केंद्र के प्रति नाराजगी बढ़ाई जा रही है। मोहाली जिले के शिंघरिवाल गांव में 70 साल के किसान जसवीर सिंह ने बताया मोदी सरकार हमारी सुन नहीं रही। मैं पहले दिल्ली गया था, अब 26 को चंडीगढ़ जाऊंगा। खेतों में पानी दे रहे किसानों ने बताया, हम खाद के लिए कतारों में लगे हैं। नेता हमें समझा रहे हैं कि यह किल्लत एक 'साजिश' है। हम केंद्र की नीतियों को पंजाब पर हावी नहीं होने देंगे। किसान नेता इसी 'गुस्से' को 'ईंधन' की तरह इस्तेमाल कर भीड़ जुटाने में लगे हैं।

यूनिवर्सिटी में सुलगती चिंगारी

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के कैंपस में मुद्दा सीनेट का है। छात्र संगठन 'सोफू' के सदस्य अवतार सिंह बताते हैं, अक्टूबर 2024 में सीनेट-सिंडिकेट का कार्यकाल खत्म हो गया लेकिन केंद्र सरकार चुनाव नहीं करवा रही। सीनेट खत्म हुई, तो 200 कॉलेजों की स्वायत्तता खत्म होगी। हम किसान संगठनों के साथ मिलकर चंडीगढ़ जाम करेंगे।

टाइमिंग का खेल, संसद सत्र से 5 दिन पहले

आंदोलनकारियों ने नई रणनीति में आंदोलन की खास टाइमिंग चुनी है। 26 नवंबर की तारीख सिर्फ 'संविधान दिवस' या आंदोलन की बरसी भर नहीं बल्कि उनकी नजर एक दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र पर भी है। उनकी रणनीति है कि आंदोलन में बवाल से संसद में पंजाब का मुद्दा प्रमुखता से उठे।

Updated on:
25 Nov 2025 09:45 am
Published on:
25 Nov 2025 07:13 am
Also Read
View All

अगली खबर