
Keralam Health Syatem: केरल में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीति गर्मा गई है। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया है कि यूडीएफ सरकार 16 सदस्यों वाले एक टास्क फोर्स के जरिए राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को 'सबोटाज' यानी कमजोर करने की कोशिश कर रही है। जबकि सरकार इसे एक्सपर्ट पैनल बता रही है और यह टास्क फोर्स स्वास्थ्य, वेलनेस और लॉन्गेविटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में सरकार ने 'केरल होलिस्टिक मॉडल फॉर हेल्थ, वेलनेस एंड लॉन्गेविटी टास्क फोर्स' बनाई। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और उपाध्यक्ष स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन हैं। इसमें सरकारी अधिकारी, डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल हैं।
इस टास्क फोर्स का लक्ष्य बीमारियों की रोकथाम, जल्द जांच, इलाज, पुनर्वास और स्वस्थ बुढ़ापे के लिए रोडमैप बनाना है। इसे दो महीने में रिपोर्ट देनी है, जिसमें पायलट प्रोजेक्ट और तीन साल का एक्शन प्लान होगा। सरकार इसे देश की पहली ऐसी पहल बताती है।
सोमवार को विधानसभा में विजयन ने कहा कि इस टास्क फोर्स का खाका उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने तैयार किया है। उनके मुताबिक, सिंघल के पास स्वास्थ्य क्षेत्र का कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में यह भी कहा कि सिंघल अभी ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया (GTTCI) हेल्थकेयर वेंचर्स के प्रमुख हैं, जो कॉरपोरेट हेल्थ सेक्टर में काम करती है।
विजयन ने टास्क फोर्स में कॉर्पोरेट हितों वाले सदस्यों को शामिल करने पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि टास्क फोर्स में निजी अस्पताल, इमेजिंग सेंटर, वेलनेस सेंटर और आयुर्वेद कंपनियों से जुड़े लोग हैं। विजयन ने कहा कि इसके पीछे सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को कॉमर्शियलाइज करने की साजिश है।
उनका कहना है कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था निजीकरण और व्यावसायीकरण की ओर जा सकती है। आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद को मिलाने यानी 'मिक्सोपैथी' और मरीजों के डेटा की प्राइवेसी पर भी सवाल उठे हैं।
विजयन के इन आरोपों पर केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि यह सब अधूरी जानकारी है। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों के नाम पढ़कर सुनाएं और विजयन के आरोपों का खंडन किया। साथ ही उन्होंने इसे विशेषज्ञों का पैनल बताया।