राष्ट्रीय

PM Modi Israel Visit: मोदी का इज़राइल दौरा, यह देश भारत के लिए कब -कब साबित हुआ है दोस्त

Geopolitics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 साल बाद इज़राइल दौरे पर हैं। जानिए कैसे 1962, 1971 और कारगिल युद्ध में इज़राइल ने एक सच्चे दोस्त की तरह भारत का साथ दिया और आज दोनों के बीच 6.5 अरब डॉलर का व्यापार है।

3 min read
Feb 22, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू । ( फाइल फोटो: ANI)

Diplomatic Tour : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फ़रवरी को ऐतिहा​सिक दो दिवसीय इज़राइल दौरे (PM Modi Israel )पर जा रहे हैं। साल 2017 के बाद यह उनका दूसरा इज़राइल दौरा है। इस कूटनीतिक यात्रा की वैश्विक स्तर पर बहुत अहमियत है, लेकिन इस मौक़े पर यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि इज़राइल ने एक सच्चे दोस्त की तरह भारत का मुश्किल वक़्त में कब-कब साथ दिया है। रक्षा, कूटनीतिक और व्यापारिक नज़रिये से दोनों देशों के रिश्ते बहुत मज़बूत रहे हैं। आइए हक़ीक़त और आंकड़ों (Facts & Figures) की रोशनी में इस दोस्ती का जायज़ा लेते हैं।

मुश्किल वक़्त का साथी: 1962 से 1999 तक (राजनयिक और फ़ौजी मदद)

भले ही भारत और इज़राइल के बीच 1992 तक पूर्ण राजनयिक संबंध नहीं थे, लेकिन इज़राइल ने संकट के वक़्त हमेशा भारत की मदद की।

1962 की भारत-चीन जंग: यरूशलम के आर्काइव्स और ऐतिहासिक दस्तावेज़ के मुताबिक़, तत्कालीन इज़राइली प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन ने पंडित नेहरू के आग्रह पर भारत को वो भी बिना इज़राइली झंडे के हथियारों की खेप भेजी थी, ताकि भारत के अरब मुल्कों से रिश्ते ख़राब न हों।

1965 और 1971 की जंग: इन दोनों ही मौक़ों पर इज़राइल ने हथियारों और गोला-बारूद (Mortars and ammunition) से भारत की ख़ुफ़िया मदद की थी ( स्रोत: '1971' Book by Srinath Raghavan)।

1999 का कारगिल युद्ध: जब भारतीय फ़ौज को ऊंची पहाड़ियों पर छिपे दुश्मनों को निशाना बनाने में दिक़्क़त आ रही थी, तब इज़राइल ने लेज़र-गाइडेड बम (Laser-guided bombs) और अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAVs) फ़ौरन मुहैया कराए थे। इसी मदद ने जंग का रुख़ मोड़ने में अहम किरदार अदा किया (Source: Indian Defence Ministry/SIPRI Reports)।

रक्षा संबंध: हथियारों का मज़बूत गठजोड़

आज भारत, इज़राइली हथियारों के सबसे बड़े ख़रीदारों में शुमार होता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत अपने कुल रक्षा आयात का एक बड़ा हिस्सा इज़राइल से ख़रीदता है। दोनों देशों ने मिल कर 'बराक-8' (Barak-8) मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम जैसी एडवांस तकनीक विकसित की है। फाल्कन 'AWACS' (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम), हेरॉन ड्रोन और बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड में इज़राइल की तकनीक भारतीय फ़ौज के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो रही है।

व्यापार के मोर्चे पर शानदार पार्टनर

भारत और इज़राइल के बीच कारोबारी रिश्ते भी शिखर पर हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) और मीडिया रिपोर्ट के आंकड़ों पर ग़ौर करें तो:

1992 में जब पूर्ण राजनयिक रिश्ते बने, तब दोनों देशों के बीच व्यापार महज़ 200 मिलियन डॉलर का था।

साल 2024 में यह आंकड़ा बढ़ कर तक़रीबन 6.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

चीन के बाद भारत, एशिया में इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा तिजारती साझीदार है।

दोनों देश एक-दूसरे के मज़बूत पार्टनर

ग़ौरतलब है कि हाल ही में, जब इज़राइल ने फ़िलिस्तीनी मज़दूरों के परमिट रद्द किए, तो वहां भारत से हज़ारों श्रमिकों को रोज़गार के लिए बुलाया गया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते ऐतबार (भरोसे) को दर्शाता है। इसी तरह साल 2014 के बाद से दोनों मुल्कों की दोस्ती परदे से बाहर आकर खुले मंच पर आ गई है। पीएम मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 2017 में इज़राइल का दौरा किया। आज वैश्विक मंचों पर, चाहे वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई हो या कृषि और जल संरक्षण (Water conservation) में तकनीकी सहयोग, दोनों देश एक-दूसरे के मज़बूत पार्टनर हैं। बहरहाल मोदी का ताज़ा दौरा इसी पुरानी, लेकिन अब पूरी तरह से परवान चढ़ चुकी दोस्ती को एक नया मुक़ाम देने की क़वायद है।

कांग्रेस ने इस दौरे की टाइमिंग को लेकर सरकार को घेरा

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत मध्य पूर्व में एक रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। वह इज़राइल के साथ रक्षा और तकनीक के रिश्ते मज़बूत करना चाहता है, लेकिन साथ ही ईरान और अन्य अरब देशों के साथ भी अपने संबंध ख़राब नहीं करना चाहता। विपक्षी दलों, ख़ासकर कांग्रेस ने इस दौरे की टाइमिंग को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे 'पाखंड' क़रार देते हुए कहा कि एक तरफ़ भारत वेस्ट बैंक में इज़राइली विस्तार की निंदा कर रहा है और दूसरी तरफ़ पीएम मोदी अपने इज़राइली समकक्ष से गले मिलने जा रहे हैं।

दुनिया भर के राजनयिकों की पैनी नज़र रहेगी

गौरतलब है कि मोदी के इस दो दिवसीय दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा ख़रीद, द्विपक्षीय व्यापार और तकनीकी सहयोग पर कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की संयुक्त प्रेस वार्ता पर दुनिया भर के राजनयिकों की पैनी नज़र रहेगी।

मध्य पूर्व में भारी तनाव के बीच यह दौरा

बहरहाल यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में भारी तनाव है और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव के बादल मंडरा रहे हैं। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत कभी नहीं चाहेगा कि मध्य पूर्व में केवल किसी एक महाशक्ति (जैसे अमेरिका या इज़राइल) का पूर्ण वर्चस्व हो।

Also Read
View All

अगली खबर