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PM मोदी की फेसबुक रील हटाने के विवाद में महुआ मोइत्रा ने जुकरबर्ग का किया समर्थन, बोलीं- सरकार के दबाव में माफी न मांगें

Mahua Moitra Zuckerberg Support: पीएम मोदी की फेसबुक रील कुछ घंटों के लिए हटाए जाने के विवाद में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग का समर्थन किया है। उन्होंने सरकार के दबाव में माफी न मांगने की अपील की।
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Aug 04, 2026
Mahua Moitra Zuckerberg Support
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मार्क जुकरबर्ग का समर्थन किया (Photo-IANS)

PM Modi Facebook Reel Removed: पीएम नरेंद्र मोदी की फेसबुक रील को कुछ घंटे के लिए हटाए जाने का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब इस मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की भी एंट्रो ही चुकी है। टीएमसी सांसद ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का समर्थन किया है। उन्होंने जुकरबर्ग से सरकार के दबाव में आकर माफी नहीं मांगने की अपील की।

एक्स पर पोस्ट करते हुए महुआ मोइत्रा ने पोस्ट करते हुए लिखा- हैलो मार्क, कृपया किसी के दबाव में न आएं और किसी से माफी न मांगें।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मोदी सरकार अक्सर नागरिकों पर दबाव बनाती है और सरकार की आलोचना करने वाली सामग्री को हटवाती है। महुआ ने कहा कि एक वीडियो का कुछ घंटों के लिए गलती से हट जाना कोई बड़ी बात नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि पूरा मामला पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा 23 जुलाई को फेसबुक पर पोस्ट की गई रील को कुछ घंटों तक हटाए जाने के बाद शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि यह वीडियो रात करीब 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक फेसबुक पर उपलब्ध नहीं था।

इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने NEET पेपर लीक को लेकर हुए बड़े युवा प्रदर्शनों पर पहली बार प्रतिक्रिया दी थी। पीएम मोदी के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा, गूगल, यूट्यूब, X और स्नैपचैट के प्रतिनिधियों को तलब किया। 

इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों से भी इस मामले में जवाब मांगा गया।

निशिकांत दुबे ने की जुकरबर्ग से माफी की मांग

इस मामले में समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से माफी मांगने को कहा। उन्होंने वीडियो के अस्थायी रूप से हटाए जाने को गंभीर मामला बताया।

दुबे ने कहा कि अगर जुकरबर्ग की ओर से माफी नहीं आती है तो समिति मेटा को मिली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस लेने की सिफारिश कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा का रवैया देश को अस्थिर करने वाला है। 

‘यह पहली बार नहीं है’

निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा से जुड़ा यह विवाद पहली बार नहीं है। उन्होंने जनवरी 2025 में मार्क जुकरबर्ग की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने 2024 के चुनावों के संदर्भ में भारत समेत कुछ देशों की मौजूदा सरकारों के चुनाव हारने की बात कही थी।

हालांकि, मेटा ने बाद में जुकरबर्ग की उस टिप्पणी के लिए माफी मांगते हुए इसे तथ्यात्मक गलती बताया था।

दुबे ने मेटा के एल्गोरिदम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एल्गोरिदम के जरिए कुछ गैर-पंजीकृत समूहों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की तुलना में ज्यादा पहुंच मिल रही है।

क्या है ‘सेफ हार्बर’?

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा मिलती है। इसके तहत प्लेटफॉर्म पर यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कंपनी को सामान्य परिस्थितियों में सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, बशर्ते वह कानून और सरकार द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं का पालन करे।

Updated on:
04 Aug 2026 04:10 pm
Published on:
04 Aug 2026 04:10 pm