बडगाम में एक शख्स द्वारा SSP के नाम पर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट चलाने का मामला सामने आया। आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी का करीबी बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
J&K News: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत का एहसास करा दिया है। पुलिस ने मंगलवार को एक ऐसे शख्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जो खुद को पुलिस अधिकारी का करीबी बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, उन्हें सूचना मिली थी कि बडगाम के पल्लर इलाके का रहने वाला समीर अली भट नाम का व्यक्ति एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट चला रहा है। यह अकाउंट बडगाम के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) के नाम पर बनाया गया था। इतना ही नहीं, वह इस अकाउंट के जरिए लोगों से चैट करता था और उन बातचीत के स्क्रीनशॉट भी इधर-उधर शेयर करता था, ताकि खुद को पुलिस अधिकारी का खास आदमी साबित कर सके।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी पहले भी कई मामलों में शामिल रहा है। पुलिस ने यह भी पाया कि वह एक खास मोबाइल नंबर (9622126997) का इस्तेमाल कर रहा था और लोगों पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। उसके इस तरीके से आम लोगों को भ्रमित किया जा रहा था, जो किसी भी तरह से खतरनाक साबित हो सकता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और बडगाम थाने में केस दर्ज किया गया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319 और आईटी एक्ट की धारा 66-सी के तहत दर्ज किया गया है, जो पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अपराधों को कवर करती हैं।
दरअसल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने जहां लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं इसके गलत इस्तेमाल के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। जम्मू-कश्मीर भी इससे अछूता नहीं है। यहां साइबर अपराध, फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन ठगी जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। पुलिस ने इस घटना के बाद लोगों से खास अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी अनजान या संदिग्ध नंबर से आए संदेशों पर भरोसा न करें। अगर कोई खुद को सरकारी अधिकारी या पुलिस से जुड़ा बताता है, तो उसकी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोत से जरूर जांच लें। साथ ही, अगर किसी को ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि दिखती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को इसकी जानकारी दें। पुलिस का कहना है कि समय रहते सूचना देने से ऐसे मामलों में जल्दी कार्रवाई की जा सकती है और दूसरों को भी ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकता है।