
पंजाब पुलिस। ( फोटो: ANI)
Punjab Police: पंजाब में क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हुए पंजाब पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। अमृतसर के भिंडी सैदा पुलिस स्टेशन पर पिछले महीने हुए ग्रेनेड हमले की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि इस आतंकी मॉड्यूल को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा तैयार किया गया था और इसे विदेशों में बैठे आकाओं द्वारा चलाया जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान अमृतसर के अलग-अलग गांवों के रहने वाले बलजीत सिंह, प्रभ सिंह, राजबीर सिंह, सुखप्रीत सिंह, अजयदीप सिंह (उर्फ अजय उर्फ गजनी) और साहिब सिंह (उर्फ सबा) के रूप में हुई है। यह सफलता अमृतसर ग्रामीण पुलिस, फरीदकोट पुलिस और फिरोजपुर काउंटर-इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई का परिणाम है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सख्त निर्देशों के बाद पूरे राज्य में असामाजिक और आतंकी तत्वों के खिलाफ यह अभियान चलाया जा रहा है।
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि यह हमला पंजाब की कानून व्यवस्था को चुनौती देने की एक सोची-समझी साजिश थी। मुख्य आरोपी बलजीत और प्रभ ने घरिंडा के पास से दो हथगोले हासिल किए थे। घटना वाली रात तीनों आरोपी मोटरसाइकिल से थाने के करीब पहुंचे। उन्होंने अपनी बाइक करीब एक-दो किलोमीटर दूर खेतों में खड़ी कर दी और पैदल ही थाने के पिछले हिस्से तक पहुंच गए ताकि कोई उन्हें देख न सके।
बलजीत और प्रभ ने थाने पर ग्रेनेड फेंके, जबकि उनके साथी राजबीर सिंह ने इस पूरे हमले का वीडियो रिकॉर्ड किया। यह वीडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को 'काम पूरा होने के सुबूत' के तौर पर भेजा जाना था। हमले के बाद ये आरोपी वापस खेतों की ओर भाग गए और सबूत मिटाने के लिए कई घंटों तक गेहूं की फसल में छिपे रहे। बाद में उन्होंने अपने कपड़े एक नाले में फेंक दिए और सुबह तड़के अपनी बाइक लेकर वहां से फरार हो गए।
डीजीपी के मुताबिक, सोशल मीडिया और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए युवाओं का ब्रेनवाश किया गया था। उन्हें सरकारी इमारतों और पुलिस थानों पर हमले के बदले भारी रकम देने का लालच दिया गया था। हालांकि, जांच में यह भी पता चला है कि वारदात को अंजाम देने के बाद पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने इन युवाओं को महज कुछ ही पैसे दिए। इन सभी आरोपियों के खिलाफ भिंडी सैदा थाने में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
डीजीपी गौरव यादव (पंजाब पुलिस): डीजीपी ने इसे एक बेहतरीन तालमेल वाला ऑपरेशन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पार से युवाओं को पैसों का लालच देकर भड़काया जा रहा है, लेकिन पंजाब पुलिस किसी भी आतंकी मॉड्यूल को पनपने नहीं देगी।
स्थानीय लोग: स्थानीय निवासियों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। ग्रेनेड हमले के बाद इलाके में दहशत का माहौल था, लेकिन इन गिरफ्तारियों से लोगों ने राहत की सांस ली है।
हथियारों की सप्लाई चेन: अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि घरिंडा के पास ये हैंड ग्रेनेड ड्रोन के जरिए गिराए गए थे या किसी स्लीपर सेल ने वहां पहुंचाए थे।
फाइनेंशियल ट्रेल की जांच: आरोपियों को पाकिस्तानी हैंडलर से जो पैसे मिले हैं, वह किस रास्ते से (हवाला या क्रिप्टो) आए, इसकी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पाकिस्तान की आईएसआई अब पंजाब में सीधे घुसपैठ करने के बजाय स्थानीय युवाओं का 'डिजिटल रेडिकलाइजेशन' कर रही है। अपराध या नशे की लत से जुड़े बेरोजगार युवाओं को विदेशी नंबरों से कॉल कर भारी रकम का लालच दिया जाता है और उन्हें 'लो-इंटेंसिटी' (कम तीव्रता वाले) हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो राज्य के लिए एक नई सुरक्षा चुनौती है। (इनपुट : ANI)
Updated on:
14 Apr 2026 09:03 pm
Published on:
14 Apr 2026 08:38 pm
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