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आठ साल की राजनीति के बाद विधायक बने प्रशांत किशोर, नितिन नवीन और तेजस्वी के लिए बनेगे चुनौती?

Bankipur By Election Result: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को बांकीपुर विधान सभा उपचुनाव में भाजपा के नीरज कुमार से करीब 19000 वोट ज्यादा मिले हैं।
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Aug 03, 2026
Bankipur By Election
प्रशांत किशोर(फोटो-IANS)

आठ साल की राजनीतिक पारी खेलने के बाद प्रशांत किशोर आखिरकार विधायक बन गए हैं। उन्होंने बांकीपुर विधान सभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के नीरज कुमार को हरा कर अपने लिए विधान सभा का दरवाजा खोल लिया है।

आठ साल का राजनीतिक सफर

किशोर 2018 में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में गए थे। नीतीश ने उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष भी बनाया था, लेकिन दोनों की निभी नहीं और कुछ ही दिनों बाद किशोर ने अपने रास्ते अलग कर लिए।

2022 में किशोर के कांग्रेस में जाने की भी खूब अटकलें लगी थीं। हालांकि, अंततः ऐसा कुछ हुआ नहीं। इससे पहले ऐसी चर्चा भी गरम हुई थी की किशोर ने कांग्रेस की चुनावी जीत के लिए प्लान बनाया था और सलाह दी थी कि कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का कोई नेता बने। उनका यह आइडिया लीक हो गया था।

कांग्रेस में जाने की अटकलें ठंडी पड़ने के साथ प्रशांत किशोर अपनी दूसरी योजना पर काम करने लगे। उन्होंने बिहार में राजनीतिक जमीन तलाशने की दिशा में काम शुरू किया। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने 2024 में गांधी जयंती (2 अक्तूबर) के मौके पर अपनी पार्टी बनाई और 2025 का विधान सभा चुनाव लड़े। इसमें नाकाम रहे तो कहा कि कोशिश जारी रहेगी। इसी बीच बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्य सभा जाने के बाद बांकीपुर विधान सभा सीट खाली हुई तो किशोर ने वहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया। अब वह विधायक हैं।

राजनीति में उतरने के बाद छोड़ा पुराना पेशा

खुद राजनीति में उतरने से पहले प्रशांत किशोर पार्टियों को चुनाव लड़ने में मदद करते थे और बदले में मोटा पैसा लेते थे। उन्होंने 2012 में गुजरात विधान सभा चुनाव में भाजपा/नरेंद्र मोदी के लिए यह किया था। इसके बाद 2014 में भी किया जब मोदी पहली बार भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने और जीते। 2022 में गोवा विधान सभा चुनाव के लिए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की मदद की। इसके अलावा भी कई राज्यों में अलग-अलग पार्टियों का चुनावी कैम्पेन मैनेज किया। इसके लिए उन्होंने I-PAC नाम की संस्था बना रखी थी।

बांकीपुर में जीत के मायने क्या

बिहार में सक्रिय होने के बाद किशोर ने ऐलान किया कि अब वह चुनावी रणनीतिकार का काम नहीं करेंगे। 2025 के बिहार विधान सभा चुनाव से पहले उन्होंने जन सुराज पार्टी बनाई, लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी बुरी तरह नाकाम रही। अब बांकीपुर में उन्हें कामयाबी मिली है तो यह बिहार में उनकी राजनीति के लिहाज से बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' है।

किशोर बिहार में जो 'राजनीतिक विकल्प' खड़ा करने की बात करते रहे हैं, उसे वह अब नई धार दे सकते हैं। विधान सभा चुनाव में उन्हें वोट नहीं देकर जनता ने एक तरह से विकल्प का उनका नारा खारिज कर दिया था। इससे उनका जो मनोबल नीचे गिरा था, किशोर की जीत से वह ऊपर उठ सकता है। इसका फायदा उठा कर किशोर बिहार में एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का अभियान और तेज कर सकते हैं। बीजेपी, जदयू और राजद के लिए यह नई चुनौती खड़ी कर सकता है। बिहार ने पिछले कई दशकों में इस तरह से किसी नई व चर्चित पार्टी का जन्म होते नहीं देखा है, जैसे जन सुराज का हुआ है। यह किसी पार्टी से टूट कर या नाराज नेता द्वारा खड़ा किया गया दल नहीं है।

Updated on:
03 Aug 2026 05:48 pm
Published on:
03 Aug 2026 05:41 pm
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