
Prashant Kishor Bankipur bypoll victory: बिहार के हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,246 वोटों के भारी अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की और भारतीय जनता पार्टी के दशकों पुराने गढ़ को ध्वस्त कर दिया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर को कुल 63,946 वोट मिले, जबकि BJP उम्मीदवार नीरज कुमार 44,700 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इस शानदार चुनावी जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने BJP के केंद्रीय नेतृत्व, राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा।
उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने अपने समर्थकों के साथ जीत का जश्न मनाने के लिए रोड शो किया। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "कोई भी किला हमेशा के लिए किसी का नहीं रहता। 30 साल पुराने गकिले को ढहने में 30 दिन भी नहीं लगे। इसका एक बड़ा कारण यह है कि चुनाव जीतने के बाद, बीजेपी ने बिहार की कमान एक ऐसे व्यक्ति को सौंप दी जिसकी सोच आपराधिक है, जिसके चरित्र और आचरण पर शक है और बिहार की जनता इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करती है।"
बांकीपुर के मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका मिशन हर नागरिक का भरोसा जीतना है। उन्होंने कहा, "यह बांकीपुर की जनता की जीत है। मैं उन लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने जन सुराज को वोट दिया। जिन्होंने हमें वोट नहीं दिया उनसे मैं कहना चाहता हूं कि हम और भी कड़ी मेहनत करेंगे और आपका भरोसा जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। बिहार को अच्छे नेतृत्व की जरूरत है, और हालात बेहतर होने ही चाहिए, चाहे कुछ भी हो जाए।"
जब प्रशांत किशोर से पूछा गया कि क्या बांकीपुर का नतीजा बिहार के मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर जनमत संग्रह जैसा है, तो उन्होंने साफ तौर पर इसे जनता का फैसला बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल साफ है कि बिहार की जनता सम्राट चौधरी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करती है। बांकीपुर की जनता की यह जीत सिर्फ एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं है। यह चुनाव बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को सीधा संदेश देता है कि वे बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर किसी काबिल व्यक्ति को नियुक्त करें।
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से अपील करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता ने उनके 202 विधायकों को चुना है, इसलिए बिहार की कमान किसी अपराधी या संदिग्ध चरित्र वाले व्यक्ति को नहीं सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि नेतृत्व किसी ऐसे काबिल व्यक्ति को सौंपा जाए जो बिहार में शिक्षा और रोज़गार के अवसर पैदा कर सके, ताकि राज्य के युवाओं को छोटे-मोटे कामों के लिए कहीं और न जाना पड़े।