Pre-Monsoon Rain Alert: हैदराबाद में ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान देखने को मिला। IMD ने तेलंगाना में 18 से 21 मार्च तक अलर्ट जारी किया है।
Heavy Rain Alert: प्री-मानसून (Pre-Monsoon) ने दस्तक दे दी है। पूरे देश में मौसम बदलता दिख रहा है। बढ़ती गर्मी के बीच राहत की बारिश हो रही है। मानसून 2025 में अच्छी बारिश देखी गई। प्री मानसून की दस्तक के साथ ही बारिश का सिलसिला चालू हो गया है। ऐसे में हैदराबाद और उसके आसपास के जिलों में बुधवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज गर्जना, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। शंकरपल्ली नगरपालिका क्षेत्र में गिरे ओलों की तस्वीरों में सड़कों और घरों के बाहर सफेद परत साफ नजर आई। दिनभर की उमस और गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ गिरने और ट्रैफिक प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव प्री-समर थंडरस्टॉर्म गतिविधियों का हिस्सा है, जो हर साल मार्च के मध्य से दक्षिण भारत में देखने को मिलती है।हैदराबाद के शंकरपल्ली, कोन्डापुर और गाचीबौली जैसे इलाकों में अचानक आसमान काला पड़ गया और तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे। तेज हवाओं और ओलावृष्टि से बचने के लिए लोगों को दुकानों, घरों और वाहनों में शरण लेनी पड़ी।
18 मार्च
राज्य के अधिकांश जिलों में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में दोबारा तेज हवाओं और बारिश के आसार हैं।
19 मार्च
मौसम और अधिक सक्रिय रहेगा। हवा की रफ्तार 40-50 किमी/घंटा तक रहने की संभावना है, जबकि झोंकों में यह 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। पेड़ों के गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और खुले सामान के उड़ने का खतरा बना रहेगा।
20 मार्च
पूर्वी और मध्य तेलंगाना के वारंगल, मुलुगु और भूपालपल्ली क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और तूफानी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
21 मार्च
तूफान का असर दक्षिणी जिलों जैसे नलगोंडा, सूर्यापेट और नगरकुरनूल में शिफ्ट होने की संभावना है। ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
तेलंगाना के कई हिस्सों में फसलें पकने की स्थिति में हैं। ऐसे में ओलावृष्टि और तेज हवाएं गेहूं, चना, मक्का और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। कृषि विभाग ने किसानों को फसल बचाने के लिए उचित ढकाव (कवरिंग) और खेतों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने की सलाह दी है।