
Prithviraj Chavan on Indian Foreign Policy: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने देश की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। चव्हाण ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विदेश नीति किसके नियंत्रण में है, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर या NSA अजीत डोभाल के? उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं, जबकि NSA एक गैर-निर्वाचित अधिकारी हैं जिन्होंने कोई संवैधानिक शपथ तक नहीं ली है।
UPA सरकार के दौर का जिक्र करते हुए पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान NSA का पद हमेशा जूनियर स्तर का होता था। उस समय NSA आंतरिक सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर विदेश मंत्री और गृह मंत्री को रिपोर्ट करते थे। लेकिन मोदी सरकार ने अजित डोभाल को कैबिनेट रैंक दे दिया है।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अब गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और NSA अजीत डोभाल सभी कैबिनेट रैंक रखते हैं और तीनों सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, एक-दूसरे को नहीं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पहले अजित डोभाल ने चीन का दौरा किया, जबकि एस जयशंकर ने रूस गए थे। ऐसे में सरकार देश को बताए कि क्या विदेश मंत्रालय से संबंधित कामकाज का कोई आंतरिक बंटवारा हुआ है।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि भारतीय संसदीय प्रणाली में कैबिनेट मंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं, जिससे उनसे नीति-संबंधी सवाल पूछे जा सकते हैं। जहां जयशंकर संसद के प्रति जवाबदेह हैं, वहीं अजीत डोभाल एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्होंने न तो कोई चुनाव लड़ा है और न ही कोई संवैधानिक शपथ ली है। पृथ्वीराज चव्हाण ने सवाल किया कि जब अजित डोभाल संसद के प्रति जवाबदेह ही नहीं हैं, तो वे किस अधिकार से देश की आधिकारिक विदेश नीति चला रहे हैं।
पृथ्वीराज चव्हाण ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) के सदस्य के तौर पर भारत इस समिट की मेजबानी कर रहा था और उसे इससे जुड़ी जिम्मेदारियों को पूरा करना था। लेकिन सिर्फ ब्रिक्स समिट का आयोजन करना ही काफी नहीं है, यह देखना भी जरूरी है कि भारत को इससे क्या ठोस फायदे हुए हैं।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि भारत को अभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका के दबाव और चेतावनियों का सामना करना पड़ रहा है, पश्चिम एशिया में ईरान संकट से उसके हितों को नुकसान पहुंच रहा है और रूस-यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थ के तौर पर उसकी कोई स्पष्ट भूमिका नहीं है। ऐसे में भारत को यह देखना चाहिए कि BRICS की अध्यक्षता और सम्मेलन के बाद देश को कूटनीतिक स्तर पर क्या लाभ मिला।
पृथ्वीराज चव्हाण ने अंत में कहा कि पाकिस्तान कई रणनीतिक क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है जबकि भारत वहीं रुका हुआ है, जिससे देश की विदेश नीति की दिशा और स्थिति को लेकर चिंता पैदा हो रही हैं। सरकार को यह साफ करना चाहिए कि भविष्य में देश की विदेश नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।