
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण बीजेपी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। SIR के जरिए विपक्ष को चुनावी मुकाबले से बाहर रखना ही असली मकसद है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में करीब एक करोड़ मतदाता छूट गए हैं।
खरगे ने कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक में SIR को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार सरकार मतदाताओं के नाम हटाए जाने और फॉर्म-7 आवेदनों की कथित थोक में छपाई की जांच करेगी। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रियांक खरगे ने कहा कि SIR भाजपा को फायदा पहुंचाने की प्रक्रिया है। यह पश्चिम बंगाल में बहुत साफ दिखा, बिहार में साफ दिखा और अब मेरे राज्य कर्नाटक में भी तेजी से साफ होता जा रहा है। एक करोड़ लोग छूट गए हैं और फॉर्म-7 की थोक में प्री-प्रिंटिंग भी यही साबित करती है कि आप समाज के कुछ वर्गों को बाहर रखने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि SIR के बाद आप फॉर्म-7 ला रहे हैं, यानी आप असल में SIR वाली मतदाता सूची को 'शुद्ध' कर रहे हैं। जो भी हो, हम इस एक करोड़ मतदाताओं का मूल्यांकन करेंगे, देखेंगे कि क्या हुआ और कैसे हुआ, और इन लोगों का पर्दाफाश करेंगे। SIR ऐसी गतिविधि है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि विपक्ष मुकाबले में रहे ही नहीं। इस दौरान उन्होंने चित्तापुर और आलंद में दर्ज मामलों का भी जिक्र किया।
कर्नाटक के गृह मंत्री ने दावा किया कि यह साजिश है। चित्तापुर में ही 40 फॉर्म-7, जो दिए गए हैं, फर्जी हैं। इसकी शिकायत ARO और ERO ने की है। यह शिकायत कुछ व्यक्तियों ने नहीं, बल्कि रिटर्निंग अधिकारियों ने दी है। जैसा मैंने कहा, हम पर्दाफाश करेंगे। हमें करना ही होगा। क्या हमने आलंद में इसका पर्दाफाश नहीं किया? उन्होंने कहा कि 6,018 फॉर्मों में से 5,994 फर्जी थे! हम पहले ही कह चुके हैं कि 22,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हम इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट गए। जहां अब मामले की सुनवाई शुरू होगी।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, अंतिम सूची में 2.26 करोड़ पुरुष, 2.29 करोड़ महिला और 2,841 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। सूची में 18-19 आयु वर्ग के 6.83 लाख युवा मतदाता और 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 3.92 लाख मतदाता भी शामिल हैं। अंतिम मतदाता संख्या पुनरीक्षण से पहले की संख्या के मुकाबले लगभग 17.92 प्रतिशत कम है। 24 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 4.46 करोड़ सामान्य मतदाता दर्ज किए गए थे, जो पुनरीक्षण से पहले के 5.54 करोड़ से 1.08 करोड़ कम थे।