
JDU से निष्कासित मोकामा विधायक अनंत सिंह। (Photo-IANS)
Anant Singh Expelled From JDU: बिहार की राजनीति में इस समय अनंत सिंह का नाम चर्चाओं में है। एमएलसी चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध कर जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। हालांकि अनुज सिंह को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम को 6 साल से निष्कासित कर दिया है। इसके अलावा अनंत सिंह की विधायकी भी रद्द करने के लिए स्पीकर को लैटर दिया है।
छोटे सरकार के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने पहली बार 2005 में चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। तब तक उनकी पहचान बाहुबली के रूप में बन गई थी। उनके समर्थक उन्हें रक्षक के रूप में देखते थे। लेकिन अनंत सिंह पर कई गंभीर आरोप भी लगे है।
बता दें कि 24 जून 2015 को पटना में एक चर्चित हत्याकांड के सिलसिले में तत्कालीन एसएसपी विकास वैभव के नेतृत्व में पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां तेज थी। अनंत सिंह की गिरफ्तारी को राज्य की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।
नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान अनंत सिंह जेल भी रहे। इसी बीच बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल बना। उनकी गिरफ्तारी और जेल में रहने का घटनाक्रम मोकामा की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में मोकामा सीट पर अनंत सिंह को जदयू ने टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसी के साथ अनंत सिंह ने मोकामा की राजनीति में अपनी पकड़ भी रखी।
नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा का विषय बनते रहे। चुनावी बयानबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस टकराव को और चर्चा में ला दिया। हाल ही में एमएलसी चुनाव में नीरज सिंह के विरोध में अनंत सिंह ने प्रचार किया था। अनंत सिंह ने जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया।
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी मोकामा और आसपास के इलाकों की राजनीति में अनंत सिंह का नाम चर्चा में रहा। उनकी पत्नी नीलम देवी ने कांग्रेस के टिकट पर मुंगेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव ने क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
अगस्त 2019 में अनंत सिंह से जुड़े एक मामले में AK-47 राइफल, कारतूस और अन्य हथियारों की बरामदगी की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद यह मामला बिहार की राजनीति और कानूनी प्रक्रिया में चर्चा का विषय बना। इस प्रकरण में हुई कार्रवाई और न्यायिक घटनाक्रम को संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर देखा जाना चाहिए।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जदयू के टिकट पर मोकामा से अनंत सिंह ने जीत दर्ज की। उनकी इस वापसी से यह धारणा और मजबूत हुई कि मोकामा में अनंत सिंह का अपना जनाधार पार्टी बदलने और जेल में रहने के दौर के बावजूद कायम रह सकता है।
बता दें कि पार्टी से निष्कासित करने के बाद अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए जेडीयू ने स्पीकर को पत्र लिखा है। विधायक अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने के लिए दसवीं अनुसूची के तहत स्पीकर को अलग से फैसला लेना होगा। वहीं यदि सिंह को अयोग्य घोषित किया जाता है, तो वे कोर्ट में भी इस फैसले को चुनौती दे सकते है।
हालांकि जदयू से निकाले जाने के बाद भी अनंत सिंह के पास कई विकल्प मौजूद है। हाल ही में मीडिया से बात करते हुए वे अपनी अलग पार्टी बनाने की भी संभावना जता चुके हैं। इसके अलावा अनंत सिंह के पास प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज में शामिल होने, आरजेडी में वापस जाने या फिर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हुए बिना अपनी राजनीति जारी रखने का विकल्प भी मौजूद है। वे चाहें तो अपनी अलग पार्टी बनाकर भी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
Updated on:
28 Oct 2026, 12:49 PM IST
Published on:
28 Oct 2026, 12:49 PM IST
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