
Sonia Gandhi voter list case
Sonia Gandhi Citizenship Controversy: नई दिल्ली में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची विवाद में कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ने से रुक गई। साल 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज होने को लेकर दाखिल शिकायत पर बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। वकीलों की हड़ताल के कारण अदालत ने मामले को 6 नवंबर तक के लिए टाल दिया। अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर हैं, जहां शिकायत पर नए सिरे से विचार किया जाना है।
सोनिया गांधी के खिलाफ यह शिकायत अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने दायर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। शिकायतकर्ता ने इस आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।
बुधवार को राउज एवेन्यू स्थित मजिस्ट्रेट अदालत में मामले पर सुनवाई प्रस्तावित थी। हालांकि, वकीलों की हड़ताल के चलते कार्यवाही नहीं हो सकी। सांसद-विधायक मामलों की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) विनोद जोशी ने अगली तारीख 6 नवंबर निर्धारित की है।
इस मामले में अहम घटनाक्रम 21 सितंबर को सामने आया था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के वर्ष 2025 के आदेश को रद्द कर दिया था। इससे पहले मजिस्ट्रेट ने सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।
सत्र अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि शिकायत खारिज करते समय पर्याप्त कारण दर्ज नहीं किए गए थे। अदालत ने पुराने आदेश को 'नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर' यानी ऐसा आदेश बताया, जिसमें फैसले के पीछे के तर्क स्पष्ट नहीं किए गए हों। न्यायालय के मुताबिक, यह स्पष्ट होना चाहिए था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं।
सत्र अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों और आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में था, जिसे 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में नाम दर्ज किए जाने की बात कही गई। शिकायत में उनके आवास का पता नई दिल्ली स्थित सफदरजंग रोड बताया गया है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार भारतीय नागरिकों से जुड़ा है। हालांकि, इन टिप्पणियों को आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। मामले में अभी यह तय होना बाकी है कि शिकायत के आधार पर आपराधिक जांच की आवश्यकता बनती है या नहीं।
सत्र अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश दस्तावेजों और आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में था, जिसे 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में नाम दर्ज किए जाने की बात कही गई। शिकायत में उनके आवास का पता नई दिल्ली स्थित सफदरजंग रोड बताया गया है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार भारतीय नागरिकों से जुड़ा है। हालांकि, इन टिप्पणियों को आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। मामले में अभी यह तय होना बाकी है कि शिकायत के आधार पर आपराधिक जांच की आवश्यकता बनती है या नहीं।
Updated on:
28 Oct 2026, 12:42 PM IST
Published on:
28 Oct 2026, 12:27 PM IST
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