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पीएसएलवी ने भरी 24वीं उड़ान, OceanSat-3 और 8 सैटेलाइट से महासागर का अध्ययन और चक्रवातों पर होगी नजर

ISRO launched PSLV-C54 rocket श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ISRO ने PSLV–C54 रॉकेट लॉन्च किया। इससे Oceansat–3 और 8 अन्य नैनो सैटेलाइट कक्षा में स्थापित होंगी। इससे अब महासागरों के वैज्ञानिक अध्ययन और चक्रवातों के बारे में जानकार हासिल की जा सकेगी।

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पीएसएलवी ने भरी 24वीं उड़ान, OceanSat-3 और 8 सैटेलाइट से महासागर के अध्ययन और चक्रवातों पर होगी नजर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में शनिवार को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C54) रॉकेट पर OceanSat-3 सैटेलाइट लॉन्च किया। इसके साथ ही PSLV-C54 रॉकेट से आठ अन्य नैनो सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा गया। भारत ने तीसरी पीढ़ी के OceanSat का प्रक्षेपण से अब महासागरों के वैज्ञानिक अध्ययन और चक्रवातों पर गहरी नजर रखी जा सकेगी। ISRO ने PSLV C54/EOS06 लॉन्च किया, इसे ओशनसैट-3 के नाम से भी जाना जाता है। इस मिशन को शनिवार सुबह 11.46 बजे श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। Oceansat सीरीज के सैटेलाइट अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट हैं। यह समुद्र विज्ञान और वायुमंडलीय अध्ययन में मददगार है। इसके अलावा यह सैटेलाइट समुद्री मौसम का पूर्वानुमान करने में सक्षम है। इसकी मदद से देश किसी भी चक्रवात का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

सबसे लंबा मिशन

ISRO के वैज्ञानिकों का यह सबसे लंबा मिशन है। इस मिशन को पूरा करने में लगभग 8,200 सेकेंड (2 घंटे 20 मीटर) चला। इस दौरान प्राथमिक उपग्रहों और नैनो उपग्रहों को दो अलग-अलग सोलर सनक्रोनस पोलर ऑर्बिट्स (SSPO) में लॉन्च किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि रॉकेट का प्राथमिक पेलोड एक ओशनसैट है। जिसे कक्षा-1 में अलग किया जाएगा। वहीं, आठ अन्य नैनो-उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में रखा जाएगा।

पीएसएलवी की 24वीं उड़ान

भारत से पीएसएलवी की 24वीं उड़ान है। वर्ष 2022 में यान का पांचवां और अंतिम लॉन्च होगा। 44.4 मीटर ऊंचे रॉकेट का यह पीएसएलवी-एक्सएल प्रारूप है। जिसमें 321 टन लिफ्ट ऑफ मास यानी खुद रॉकेट, बूस्टर, प्रोपेलेंट, उपग्रह व उपकरणों को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता है।

Updated on:
26 Nov 2022 01:32 pm
Published on:
26 Nov 2022 01:29 pm
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