
Punjab AAP MLAs join BJP: पंजाब की राजनीति अचानक गर्मा गई है। तीन आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए, और इसके बाद सियासी चर्चाएं तेज हो गईं। इसी माहौल में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विरोधियों की पुरानी बातों पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार गिराने की अटकलों को सिर्फ बातें बताते हुए पार्टी छोड़ने वाले विधायकों के फैसले पर नाराजगी भी जताई।
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में गोयल ने कहा कि शुरू से ही विपक्ष सरकार गिराने और विधायक तोड़ने की बातें करता आ रहा है। कभी 35, तो कभी 30 विधायकों को अपने संपर्क में होने के दावे किए गए, मगर अब तक सिर्फ बातें ही साबित हुई हैं। गोयल का कहना है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पिछले पांच सालों में जो काम किए, वो पिछली सरकारें पांच दशकों में भी नहीं कर पाईं।
उन्होंने विपक्ष के बयानों को सिर्फ राजनीतिक स्टंट करार दिया और कहा-इन बातों से विपक्ष बस अपना हौसला बढ़ाता है, लेकिन हकीकत सबके सामने है। उनके मुताबिक, सरकार पर उठ रही चर्चाओं के बावजूद कामकाज कभी नहीं रुका यही उनकी सरकार की मजबूती का असली सबूत है।
पार्टी छोड़ने वाले विधायकों पर भी गोयल ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “पार्टी ने इन नेताओं को पहचान दी, सम्मान दिया, विधानसभा तक पहुंचाया। परेशानियां थीं तो संगठन के अंदर रखनी चाहिए थीं, सीधे बाहर जाकर पार्टी छोड़ना हमें सही नहीं लगा।” उनका मानना है कि अगर किसी विधायक को कोई गिला था तो बात करके हल निकाला जा सकता था। मतभेद के बावजूद संगठन से अलग होना उन्हें ठीक नहीं लगा। हां, उनका ये भी कहना है कि हर किसी के अपने कारण हो सकते हैं।
अब बात उन तीन विधायकों की, जिनकी वजह से सियासत गरमाई। 2 नवंबर 2026 को आम आदमी पार्टी के तीन विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा BJP में शामिल हुए। कुंवर विजय प्रताप सिंह अमृतसर नॉर्थ, चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना और हरमीत सिंह पठानमाजरा सनौर से विधायक थे। कुंवर विजय प्रताप सिंह पूर्व आईपीएस रहे हैं। इसमें चेतन सिंह और हरमीत सिंह ने पहले पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी थी, और कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया था। इनका बीजेपी में जाना वाकई पंजाब की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम है।
2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, तो अभी से ही राजनीति सरगर्म है। हर पार्टी संगठन को मजबूत करने और टिकट फाइनल करने में जुटी है। आम आदमी पार्टी ने 31 अक्टूबर को 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की, और अगले ही दिन तीन विधायक बीजेपी में चले गए यानी नए सियासी संग्राम की शुरूआत हो गई।
बरिंदर गोयल का बयान सिर्फ पार्टी छोड़ने पर प्रतिक्रिया नहीं है इसमें सरकार की स्थिरता और विपक्ष की रणनीतियों को लेकर आम आदमी पार्टी की सोच भी साफ झलकती है। आगे देखना दिलचस्प होगा कि इन बदलावों के बाद पंजाब की राजनीति का सूरत-ए-हाल कैसा रहता है, और दोनों दलों की रणनीति में क्या बदलाव आते हैं।