
Egg Donor Racket : व्हाट्सऐप पर तय होती थी महिलाओं की कीमत! हैदराबाद पुलिस ने पकड़ा देशभर में फैला अंडाणु कारोबार (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Hyderabad Egg Donation Scam: संतान की चाहत और आर्थिक मजबूरी के बीच हैदराबाद में एक ऐसा कथित नेटवर्क सामने आया है, जिसने प्रजनन चिकित्सा से जुड़े एक संवेदनशील पहलू पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां महिलाओं को अंडाणु दान के लिए सिर्फ पैसों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जाति, धर्म, रंगत, कद और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के हिसाब से तलाशा जा रहा था। पुलिस की जांच में सात राज्यों तक फैले इस नेटवर्क के काम करने का तरीका सामने आया है।
हैदराबाद में मल्काजगिरी पुलिस ने शनिवार को कथित अवैध अंडाणु दान रैकेट का पर्दाफाश किया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी अमित शर्मा था, जो अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अलग-अलग राज्यों से महिलाओं को भर्ती करता था। पुलिस के अनुसार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, झारखंड और ओडिशा से महिलाओं को इस नेटवर्क में शामिल किया गया था।
आरोपियों पर महिलाओं के हॉस्टल चलाने की आड़ में इस गतिविधि को संचालित करने का संदेह है। पुलिस को आशंका है कि इन आवासीय ठिकानों पर संभावित अंडाणु दाताओं को रखा जाता था और बाद में उन्हें IVF केंद्रों तक ले जाया जाता था।
जांच में सामने आया कि अंडाणु प्राप्त करने के इच्छुक दंपती अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक महिलाओं का चयन करना चाहते थे। उनकी मांग में जाति, धार्मिक पृष्ठभूमि, त्वचा का रंग, लंबाई, शिक्षा और क्षेत्रीय पहचान जैसी बातें शामिल थीं।
पुलिस के मुताबिक, महिलाओं को कथित तौर पर 20 से 30 हजार रुपये तक देने का प्रस्ताव दिया जाता था, जबकि कुछ मामलों में यह रकम 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी। जांच अधिकारी के अनुसार, मांग जितनी विशिष्ट होती थी, संबंधित नेटवर्क द्वारा वसूली जाने वाली रकम भी उतनी अधिक होती थी।
बेगमपेट के इंस्पेक्टर पी. सैदुलु ने द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) को बताया कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते थे। उनके अनुसार, एजेंट व्हाट्सऐप ग्रुप और दूसरे संचार माध्यमों के जरिए महिलाओं की जानकारी साझा करते थे। किसी दंपती की मांग मिलने पर नेटवर्क में उपयुक्त महिला की तलाश शुरू कर दी जाती थी।
पुलिस का कहना है कि पहले से इस प्रक्रिया से जुड़ी महिलाओं के रेफरल भी नई महिलाओं की भर्ती का एक अहम माध्यम थे।
अब जांच का दायरा उन IVF केंद्रों तक पहुंच गया है, जिनका इस नेटवर्क से कथित संबंध होने की आशंका है। मल्काजगिरी के डीसीपी सी. श्रीधर ने बताया कि पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि अंडाणु दाताओं की पहचान और उनकी पात्रता की पुष्टि करना IVF केंद्रों की जिम्मेदारी किस तरह तय होती है।
दरअसल, IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें शरीर के बाहर अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन कराया जाता है। इस तकनीक ने निसंतान दंपतियों के लिए उम्मीद के नए रास्ते खोले हैं। हालांकि, अंडाणु दान की प्रक्रिया में महिला की सहमति, स्वास्थ्य सुरक्षा, पहचान का सत्यापन और कानूनी नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
फिलहाल पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और किन चिकित्सा संस्थानों तक इसकी पहुंच थी।
Updated on:
2 Nov 2026, 2:46 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 1:46 PM IST
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