
फोटो साभार: AI
Employee Denied Promotion Due To Good Work: ऑफिस में अच्छा काम प्रमोशन की राह में बाधा भी बन सकता है। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन ऐसा हकीकत में हुआ है। एक कर्मचारी ने दावा किया है कि उसे केवल इसलिए प्रमोशन नहीं दिया गया, क्योंकि प्रबंधन अच्छे काम को देखते हुय उसे डिपार्टमेंट से हटाना नहीं चाहता था। एक रेडिट पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि अच्छा काम करना और भरोसेमंद होना ही उसकी तरक्की में रुकावट बन गया।
पोस्ट में अपना अनुभव शेयर करते हुए कर्मचारी ने लिखा है- मेरे मैनेजर ने स्वीकार किया कि मुझे केवल इसलिए प्रमोशन नहीं दिया गया, क्योंकि मेरे बिना विभाग का काम सुचारू तौर पर नहीं हो पाएगा। क्या अब नौकरी छोड़ने का समय आ गया है?। रेडिट यूजर ने आगे लिखा है– मैंने बीते चार साल वेंडर से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने, कामकाजी घंटों के बाद भी क्लाइंट की जरूरतों को पूरा करने और कर्मचारियों के हर नए बैच को ट्रेनिंग देने में बिताए। नवंबर में जब डिपार्टमेंट हेड ने इस्तीफा दिया, तो उन्हें लगा कि अपने अनुभव और योगदान के कारण वे इस खाली लीडरशिप पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं। हालांकि, कंपनी ने बाहर के कैंडिडेट से पद भरने का फैसला किया। रेडिट यूजर का दावा है कि नए बॉस ने अपने शुरुआती दो महीने, बुनियादी आंतरिक कामकाज को समझने के लिए उनकी ही मदद ली।
एक दिन जब लंच के दौरान उन्होंने अपने मैनेजर से उन्हें प्रमोट न करने की वजह जानी, तो जवाब मिला- सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हें प्रमोट कर देता, तो मेरा पूरा विभाग ही प्रभावित हो जाता, क्योंकि तुम ही एकमात्र ऐसी कर्मचारी हो जिसे पता है कि इस जगह को कैसे चलाना है। इस जवाब ने कर्मचारी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या काम में बहुत ज्यादा अच्छा और भरोसेमंद होना नुकसानदेह साबित हुआ। निराश कर्मचारी का अब मानना है कि जो कर्मचारी लगातार मुश्किल कामों की जिम्मेदारी उठाता है, अक्सर एक ही पद पर अटक कर रह जाता है, क्योंकि मैनेजमेंट उसे किसी और से बदलना नहीं चाहता।
अपने अनुभव पर विचार करते हुए, रेडिट यूजर ने कहा कि कभी-कभी जरूरत से ज्यादा अच्छा काम करना एक प्रोफेशनल जाल में फंसने जैसा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि कैसे कार्यस्थल पर वफादारी और काबिलियत का इस्तेमाल कर्मचारियों के खिलाफ किया जा सकता है- खासकर उन महिलाओं के खिलाफ, जो ऐसी जिम्मेदारियां उठाती हैं, जिनसे विभाग का कामकाज चलता रहता है।
अपने बॉस से मिले इस झटके के बाद अब कर्मचारी ने काम करने के अपने तरीके को बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने विभाग में हर समस्या को सुलझाने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाना बंद कर दिया है, वीकेंड पर स्लैक नोटिफिकेशन बंद कर दिए हैं और खुद आगे बढ़कर काम करना भी बंद कर दिया है।
इस पोस्ट से अनलाइन बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई जरूरत से ज्यादा अच्छा काम नुकसानदायक है? कई यूजर्स ने इस पर अपने विचार प्रकट किए हैं। एक यूज़र ने इसे कार्यस्थल की एक जानी-पहचानी समस्या बताते हुए टिप्पणी लिखी है- यह वही पुराना जाल है कि आप इतने कीमती हैं कि आपको प्रमोट नहीं किया जा सकता। मैनेजमेंट आपको पूरी तरह से थकाकर निचोड़ देना पसंद करेगा, बजाय इसके कि वे आपकी जगह दो नए लोगों को काम पर रखने और उन्हें ट्रेनिंग देने की जहमत उठाए।
एक और रेडिटर ने कहा- उस मैनेजर ने असल में अपनी अक्षमता को ही कबूल कर लिया है। इसे 'क्वाइट क्विटिंग' (quiet quitting) कहते हैं; आप बस उतना ही काम कर रहे हैं जितना जरूरी है, जब तक कि आपको कोई ऐसी जगह न मिल जाए जो आपके काम की कद्र करे, न कि उसके लिए आपको सजा दे। एक अन्य यूजर ने थोड़ा सीधा तरीका सुझाते हुए बेहतर सैलरी के लिए बातचीत करने की सलाह दी। उसने लिखा, उन्हें एक अल्टीमेटम दें। या तो आपकी सैलरी नए रखे गए कर्मचारी से 15% ज्यादा हो, या फिर आप नौकरी छोड़ देंगी। और अगर वे न मानें, तो सच में छोड़ दें। बिना किसी नोटिस के। इसी तरह एक और यूजर ने कहा है - पेशेवर धोखे को लेकर मन ही मन कुढ़ते रहना बेकार है। अपनी मांगें उनके सामने रखें और उन्हें तय करने दें कि क्या आपको काम पर बनाए रखना उनके लिए फायदेमंद है या नहीं।
(ये आर्टिकल यूजर बेस कंटेंट पर आधारित है। इसमें किए गए दावों की तथ्यात्मक पुष्टि पत्रिका डॉट कॉम नहीं करता है)
Updated on:
2 Nov 2026, 3:59 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 3:59 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.