
BJP Akali Dal Alliance Update: नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की संभावनाएं तेज हो गई हैं। दोनों दलों के बीच गठबंधन को फिर से बहाल करने और सीट बंटवारे को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच गई है। हालांकि, सीटों के बंटवारे और भाजपा के करीबी माने जाने वाले अकाली दल के बागी गुट को गठबंधन में जगह देने जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। दोनों दलों के नेताओं को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इन मसलों का समाधान निकल सकता है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी ने वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था। उस समय किसान संगठनों का आंदोलन तेज हो रहा था। गठबंधन टूटने से पहले पंजाब की राजनीति में अकाली दल की स्थिति भाजपा से मजबूत थी, लेकिन 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट आई। दूसरी ओर, भाजपा ने अपना जनाधार बढ़ाया है। ऐसे में नए गठबंधन की स्थिति में दोनों दलों के बीच सीटों का समीकरण बदल सकता है।
TOI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में भाजपा की सीटों का हिस्सा पहले के मुकाबले लगभग दोगुना हो सकता है। अकाली दल के साथ गठबंधन के दौरान भाजपा 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। अब पार्टी राज्य में अपनी बढ़ी हुई राजनीतिक ताकत के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर सकती है।
भाजपा ने अब तक सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कह रही है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को पंजाब में 18 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, जो राज्य में उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया गया। वहीं, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी कांग्रेस को करीब 26-26 प्रतिशत वोट मिले थे। अकाली दल का वोट शेयर घटकर 13 प्रतिशत से कुछ अधिक रह गया था।
हालांकि, भाजपा और अकाली दल के बीच बातचीत जारी है। भाजपा अकाली दल के अलग हुए गुट, पुनर्सुरजीत, को भी सम्मानजनक सीट बंटवारा देने की संभावनाएं तलाश रही है। इस कारण अंतिम समझौते पर पहुंचने में समय लग रहा है।
दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाएं बढ़ने की एक प्रमुख वजह सत्ता में वापसी की कोशिश है। माना जा रहा है कि साथ आकर दोनों दल पंजाब में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत कर सकते हैं। इसके अलावा, भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की शुरुआती सोच में शामिल हिंदू-सिख एकता के सामाजिक समीकरण को फिर मजबूत करने पर भी जोर है।
सीमावर्ती राज्य पंजाब में धार्मिक और सामाजिक समीकरणों का राजनीतिक महत्व रहा है। इसी बीच, जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े संगठन वारिस पंजाब दे की राजनीतिक गतिविधियों और उसके एजेंडे को लेकर भी राज्य की राजनीति में चर्चा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान ने भी पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया है। शाह ने कहा था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेगा। वहीं, सुखबीर सिंह बादल ने भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलावा अन्य दलों के साथ हाथ मिलाने की संभावना से इनकार नहीं किया है। इन बयानों के बाद दोनों दलों के फिर से साथ आने की अटकलें तेज हुई हैं।
फिलहाल, सीटों की संख्या और बागी अकाली गुट को समायोजित करने जैसे मुद्दों पर अंतिम सहमति का इंतजार है। यदि बातचीत सफल रहती है, तो पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर भाजपा और अकाली दल का पुराना राजनीतिक गठबंधन आकार ले सकता है।