
Punjab Politics: पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने तैयारी तेज कर दी है। हालांकि पार्टी के बीच अंदरूनी गुटबाजी भी तेज है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे है। इसी बीच पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान शुरू किया। लेकिन यह भी अंदरूनी कलह के कारण विवादों में घिर गया है।
बता दें कि 31 जुलाई से 8 अगस्त तक पंजाब के करीब 18 जिलों में कांग्रेस के संगठनात्मक दौरे के दौरान कई जगह नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच खुले तौर पर टकराव देखने को मिला। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और कुछ स्थानों पर एआईसीसी प्रभारी भूपेश बघेल के समर्थक आमने-सामने नजर आए। भूपेश बघेल के विरोध में गो बैक के भी नारे लगे।
पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने आगामी चुनाव को लेकर जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। लेकिन कई जगहों पर संगठन को मजबूत करने के मुद्दों के बजाए अमरिंदर सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने की मांग हुई। इसके अलावा चन्नी को सीएम फेस भी घोषित करने की बात कही।
पटियाला और संगरूर में चन्नी समर्थकों ने ‘चन्नी लाओ, पंजाब बचाओ’ के नारे लगाए। इससे नाराज बघेल ने चेतावनी दी कि पार्टी कार्यक्रमों में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गंभीर मामलों में कार्रवाई, यहां तक कि निष्कासन भी हो सकता है।
लगातार हो रहे विवादों के बावजूद भूपेश बघेल ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के भीतर उत्साह का दावा किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है।
बघेल ने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने के लक्ष्य के साथ तैयारी कर रही है।
पार्टी के भीतर जारी असंतोष का एक और संकेत सामने आया है। पंजाब कांग्रेस के 15 विधायकों ने कांग्रेस हाईकमान को पत्र लिखकर एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात का समय मांगा।
पार्टी का एक विधायक पहले ही निलंबित है और वह बीजेपी के साथ जा चुका है। विधायकों ने अपने पत्र में कई गंभीर और जरूरी मुद्दों पर हाईकमान से चर्चा की इच्छा जताई है।
बता दें कि प्रदेश कांग्रेस में राजा वड़िंग और चरनजीत सिंह चन्नी के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान लगातार जारी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा भी पंजाब कांग्रेस की व्यापक गुटीय राजनीति का हिस्सा बने हुए हैं। अलग-अलग कार्यक्रम, सार्वजनिक बयानबाजी और शक्ति प्रदर्शन अब पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लगातार उजागर कर रहे हैं।
पंजाब कांग्रेस के सामने अब चुनौती केवल दो नेताओं के बीच मतभेद खत्म करने की नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पार्टी की अंदरूनी नेतृत्व लड़ाई ही उसकी सार्वजनिक राजनीतिक पहचान न बन जाए।
विधानसभा चुनाव 2022 से पहले भी कांग्रेस में गुटबाजी सामने आई थी। उस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच गुटबाजी थी। इसको खत्म करने के लिए पार्टी हाईकमान ने कैप्टन की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया। लेकिन चन्नी के सीएम फेस पर कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर पाई और आम आदमी पार्टी की सरकार बनी।