
Saurav Das: पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को जारी करने के पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर राजनीतिक टिप्पणी करना कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। बीजेपी नेता और पंजाब बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव एडवोकेट नितिन गर्ग ने दास के खिलाफ हाई कोर्ट में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सौरव दास ने 20 अगस्त को सोशल मीडिया साइट 'X' पर हाई कोर्ट के 3 अगस्त के फैसले पर सवाल उठाते हुए न्यायपालिका और उसके फैसले को राजनीतिक चश्मे से पेश किया। याचिका में उनके पोस्ट को कोर्ट के फैसले को बदनाम करने और उसकी गंभीरता को कम करने वाला बताया गया है।
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को पंजाब सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को DA/DR की लंबित किस्तें जारी करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सरकार से कहा था कि इन बकाया राशि का भुगतान 31 अगस्त तक किया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाये का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक पंजाब सरकार प्रिंट और सोशल मीडिया में बड़े स्तर पर विज्ञापन जैसे गैर-जरूरी खर्च न करे। यह फैसला चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने सुनाया था। उस समय जस्टिस मिश्रा हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे।
20 अगस्त को 'X' पर किए गए एक पोस्ट में सौरव दास ने दावा किया था कि यह मामला पहले एक दूसरी पीठ के सामने था और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा ने इसे उस पीठ से वापस ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम रोस्टर के नियमों के खिलाफ था। दास ने इस मामले को 'राजनीतिक रूप से संवेदनशील' बताते हुए दावा किया था कि हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को बीजेपी की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पंजाब सरकार के खिलाफ करीब 20,000 करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारी पैदा करने वाला आदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि कोर्ट ने भुगतान के लिए उपलब्ध समय को 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया, जो व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं है। दास ने पंजाब के कर्ज से जुड़े मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उठाए जाने का भी दावा किया था।
सौरव दास ने अपने पोस्ट में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति को भी इस मामले से जोड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि 3 अगस्त के आदेश के कुछ दिन बाद 6 अगस्त को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को उसी हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने के लिए आगे बढ़ाया गया। दास ने इसे संयोग बताते हुए न्यायिक मामलों में रोस्टर और 'मास्टर ऑफ रोस्टर' की शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पहले के एक मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल में आम आदमी पार्टी से बीजेपी में गए सांसदों से जुड़े कथित राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों का उदाहरण भी दिया था।
नितिन गर्ग की याचिका में कहा गया है कि सौरव दास ने अपने एक्स पोस्ट के जरिए हाई कोर्ट के फैसले को राजनीतिक दल के हित में काम करने वाले फैसले के तौर पर पेश किया। याचिका के मुताबिक, इससे कोर्ट के फैसले की प्रतिष्ठा और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि दास का यह दावा गलत है कि कोर्ट ने भुगतान की समयसीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी थी। याचिका के अनुसार, कोर्ट ने ऐसा नहीं किया, बल्कि भुगतान के लिए एक व्यावहारिक नई समयसीमा तय की थी।