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अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सालबोनी जमीन मामले में अग्रिम जमानत से इनकार

Abhishek Banerjee PA: अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को सालबोनी जमीन मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जानें पूरा मामला।
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भारत

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Rahul Yadav

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Updated: 10 Sep 2026, 1:48 PM IST

West Bengal SIR, Supreme Court West Bengal

West Bengal SIR " बंगाल में वोटिंग के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, 16 अक्टूबर को अहम सुनवाई (फोटो - सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट)

Abhishek Banerjee PA Sumit Roy Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के कथित सालबोनी जमीन मामले में रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। रॉय ने गिरफ्तारी से पहले जमानत की मांग की थी। उनका कहना था कि इस मामले में उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई ठोस सबूत नहीं है।

मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ शंकरनारायणन ने दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि रॉय को मामले में फंसाया जा रहा है और उनके खिलाफ जांच के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

FIR में आरोपी नहीं हैं सुमित रॉय

रॉय के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनका नाम FIR में आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकारी जमीन से जुड़े कथित लेन-देन से पैदा हुई रकम रॉय के निजी बैंक खाते में पहुंचने का कोई सबूत जांच में नहीं मिला है।

बचाव पक्ष के मुताबिक, रॉय के निजी खाते में व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ी नकद जमा राशि केवल 60 हजार रुपये थी। वकील ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी TMC के बैंक खाते में हुए लेन-देन को रॉय के निजी वित्तीय लेन-देन से जोड़ रही है।

पार्टी के खाते में जमा रकम पर कोर्ट के सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने TMC के बैंक खाते में हुई कुछ नकद जमा पर भी सवाल उठाए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि बैंक स्टेटमेंट में ऐसे नकद जमा दिखाई देते हैं जो याचिकाकर्ता से जुड़े PAN नंबर से संबंधित हैं। बचाव पक्ष ने इस पर कहा कि संबंधित बैंक खाता TMC का है। उसमें कई अलग-अलग स्रोतों से पैसा आता है। इनमें पार्टी की सदस्यता फीस भी शामिल है।

जस्टिस बागची ने सवाल किया कि अगर रॉय को कथित तौर पर अवैध रकम दिए जाने का आरोप है, तो पार्टी के खाते में जमा ऐसी रकम अपराध से हुई कमाई की जांच में किस तरह प्रासंगिक हो सकती है।

करीब 88 घंटे हो चुकी पूछताछ

रॉय के वकील ने यह भी कहा कि कथित जमीन लेन-देन करीब पांच साल पुराने हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि रॉय ने कथित अवैध रकम हासिल की या उसे संभाला। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामले के मुख्य आरोपी ने रॉय को कोई पैसा देने का आरोप नहीं लगाया है। ऐसे में उनकी हिरासत में पूछताछ की जरूरत समझ से बाहर है।

वकील के मुताबिक, रॉय से जांच के दौरान करीब 88 घंटे पूछताछ पहले ही की जा चुकी है। इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर हिरासत में पूछताछ करने की जरूरत नहीं है।

राजनीतिक रूप से प्रेरित है मामला

रॉय के वकील ने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित भी बताया। उन्होंने दलील दी कि रॉय इस पूरे मामले में एक छोटे स्तर के व्यक्ति हैं और जांच का उद्देश्य उनसे विपक्ष के कुछ बड़े नेताओं के नाम लेने के लिए दबाव बनाना है। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि रॉय को एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल कर राजनीतिक दल के दूसरे नेताओं को मामले में जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

वकील ने कोर्ट के सामने कहा कि जांच एक तरह की फिशिंग और रोविंग इंक्वायरी बन गई है। यानी जांच एजेंसी पहले से तय आधार के बजाय अलग-अलग संभावनाओं को तलाशते हुए आगे बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

इन दलीलों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। यानी फिलहाल उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं मिली है। मामले में सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। इसलिए कोर्ट ने किन विस्तृत आधारों पर याचिका खारिज की, इसकी पूरी तस्वीर विस्तृत आदेश आने के बाद साफ होगी।

क्या है सालबोनी जमीन मामला?

यह मामला पश्चिम बंगाल के सालबोनी इलाके में कथित जमीन लेन-देन और उससे जुड़ी रकम की जांच से संबंधित है। जांच में आरोपित लेन-देन और कथित अपराध से हुई कमाई के बीच संबंध की पड़ताल की जा रही है। सुमित रॉय की ओर से कोर्ट में लगातार यही दलील दी गई कि उनके खिलाफ कथित जमीन सौदों से जुड़ी रकम हासिल करने या संभालने का कोई ठोस सबूत नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उन्हें मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है और लंबी पूछताछ के बावजूद उनके खिलाफ पर्याप्त सामग्री सामने नहीं आई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी अग्रिम जमानत की मांग स्वीकार नहीं की है।

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