
Jangalmahal Tribal Protest: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने सबसे बड़ा वादा उद्योगों की वापसी को बताया था। औद्योगिक प्रोजेक्ट को लेकर पश्चिम बंगाल के जंगलमहल जिलों के आदिवासियों में चिंताएं हैं। वह पुरुलिया में लगने वाले औद्योगिक प्रोजेक्ट को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि लगातार बढ़ते औद्योगिक प्रोजेक्टों ने उनके पानी, जमीन और जंगल के अधिकारों का उल्लंघन किया है। सोमवार को पुरुलिया के मानबाजार में आयोजित महासम्मेलन में आदिवासियों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि किसी भी गैर-आदिवासी समुदाय को आदिवासी का दर्जा मिले।
भारत जकात माझी परगना महल की पुरुलिया जिला इकाई द्वारा बुलाए गए महासम्मेलन में 20 अन्य आदिवासी संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। झारग्राम, बांकुड़ा और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जिलों के आदिवासी प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। भारत जकात माझी परगना महल के पुरुलिया जिला प्रमुख रतनलाल हांसदा ने कहा कि हम अपने अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं। जंगल, जमीन और पानी हमारा संवैधानिक अधिकार हैं। यह महासम्मेलन आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए था।
आदिवासी संगठन से जुड़े नेताओं ने कहा कि स्पंज आयरन जैसी फैक्ट्रियों के लगने से आदिवासी बस्तियां प्रभावित हो रही हैं। जन सुनवाई की प्रक्रिया में आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों को बुलाया ही नहीं गया। वहीं, प्रकृति बांचाओ ओ आदिवासी बांचाओ मंच के दक्षिण बंगाल संयोजक राजेन टुडू ने कहा कि हमारा किसी एक सरकार से शिकायत नहीं है, क्योंकि हमने देखा है कि सभी सरकारें आदिवासी अधिकारों को प्राथमिकता देने में सबसे कम रुचि रखती हैं। हजारों फर्जी एसटी प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं और संविधान से मिले हमारे अधिकारों पर बुरा असर पड़ा है।
राजेन टुडू ने कहा कि पुरुलिया में खनिज आधारित उद्योग लगाना पिछली सरकारों में भी आम बात रही है। इसी वजह से शुभेंदु सरकार के सामने अपनी मांग रखने के लिए हमने बड़ा सम्मेलन किया। टुडू ने कहा कि पिछली सरकार के खिलाफ हमने पुरुलिया की अयोध्या पहाड़ियों पर तीन परियोजनाओं के खिलाफ आंदोलन चलाया था। अगर आदिवासी अधिकारों पर हमले का सिलसिला जारी रहा, तो हम अपने सम्मेलन और आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे।
वहीं, शुभेंदु सरकार के सामने इस महासम्मेलन के बाद दोहरी चुनौती सामने उभरकर आई है। पहली कि बीजेपी ने राज्य में औद्योगिकरण का वादा किया है। पार्टी ने चुनाव के दौरान कहा था कि बंगाल के लोगों को बाहर नौकरी करने की जरूरत नहीं है। राज्य में सरकार बनने के बाद यहीं औद्योगिक ईकाईयां स्थापित की जाएंगी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के चलते इससे बड़े औद्योगिक घरानों सिंगूर की याद आ सकती है। जिसके चलते टाटा को अपना नैनो प्रोजेक्ट गुजरात शिफ्ट करना पड़ा था। दूसरी, तरफ जंगलमहल इलाके में इस चुनाव में बीजेपी ने आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित सभी 16 विधानसभा सीटें जीती थीं। लिहाजा, आदिवासियों के मोहभंग होने से 2029 के लोकसभा चुनाव व आगामी निकाय चुनाव पर भी असर पड़ सकता है। लिहाजा, सीएम शुभेंदु ने भरोसा दिलाया है कि आदिवासी बहुल इलाकों पर कल्याण के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा।