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5G की रफ्तार बढ़ाने के लिए रेडिएशन लिमिट दोगुनी, अगले महीने से लागू होंगे नए नियम

5G Speed Boost: केंद्र सरकार देश में 5G की रफ्तार बढ़ाने के लिए रेडिएशन लिमिट को दोगुनी करने की तैयारी में है।
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Aug 30, 2026
5G
5G (Representational Photo)

केंद्र सरकार देश में बढ़ते 5G ट्रैफिक के बीच और ज़्यादा अच्छी सर्विस देने के लिए मोबाइल नेटवर्क के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (ईएमएफ)/रेडिएशन नियम की सीमा में ढील देने की तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इसे 5G बेस टावर स्टेशन (बीटीएस) के लिए तय पावर डेंसिटी को मौजूदा 5 वॉट से दोगुना करके 10 वॉट प्रति स्क्वायर मीटर करने की तैयारी की जा रही है। यह ग्लोबल स्टैंडड्र्स के बराबर कर दिया गया है।

अगले महीने से लागू होंगे नए नियम

खास बात है कि इसके नए नियम अगले महीने से लागू होंगे। इससे टेलीकॉम ऑपरेटर्स कम टावरों के ज़रिए बड़े इलाके को कवर कर सकेंगे। इससे सिग्नल्स को ज़्यादा दूरी तय करने में मदद मिलेगी और नेटवर्क बढ़ाने की लागत भी घटेगी।

टेलीकॉम कंपनियाँ लंबे समय से कर रही थी मांग

टेलीकॉम कंपनियाँ लंबे समय से इसकी मांग कर रही थीं। उनका कहना था कि पुरानी रेडिएशन लिमिट की वजह से 5G नेटवर्क का कवरेज प्रभावित हो रहा था और ऐसा न हो, इसी वजह से इस मिलित को बढ़ाने की मांग की जा रही थी।

स्वास्थ्य पर पडऩे वाले असर को लेकर चर्चा फिर शुरू

रेडिएशन लिमिट को बढ़ाने को लेकर लोगों में एक बार फिर स्वास्थ्य पर पडऩे वाले असर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि टेलीकॉम कंपनियों का दावा है कि दुनियाभर में हो रहे अध्ययन के अनुसार इसका सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। गौरतलब है कि 10 वॉट का नियम दुनिया के करीब 137 देशों में लागू हैं। इनमें ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, साउथ कोरिया और सिंगापुर भी शामिल हैं।

रेडिएशन बढऩे के खतरें

रेडिएशन बढ़ने के खतरे हैं। ऐसा होने पर सिरदर्द, थकान और नींद की समस्या बढ़ सकती हैं। आंखों और त्वचा पर असर का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य पर ज़्यादा असर पड़ सकता है। टावरों के आसपास रहने वालों के लिए रेडिएशन एक्सपोज़र बढ़ सकता है, जो उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

Updated on:
30 Aug 2026 03:17 am
Published on:
30 Aug 2026 03:17 am