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IDBI बैंक के निजीकरण पर बरसे राहुल गांधी, बोले- कनाडाई कंपनी को बेच रही सरकार, खत्म हो जाएगा आरक्षण

IDBI Bank Sale: राहुल गांधी ने IDBI बैंक की बिक्री को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों के समर्थन में कहा कि कांग्रेस के समय देश के औद्योगिक विकास के लिए बैंक बनाए गए, जबकि मौजूदा सरकार उन्हें बेच रही है। राहुल गांधी ने बैंक की हिस्सेदारी, कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और SC, ST तथा OBC आरक्षण के भविष्य को लेकर चिंता जताई।
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Updated: 30 Oct 2026, 10:37 AM IST
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राहुल गांधी(Photo-IANS)

Rahul Gandhi on IDBI Bank Sale: आईडीबीआई (IDBI) बैंक के निजीकरण और हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एतराज जताया है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के समय में देश के उद्योगों को खड़ा करने के लिए आईडीबीआई जैसे संस्थान बने थे, लेकिन मौजूदा सरकार में पहले बोली देखी जाती है और फिर दाम तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दौर में बैंक बनते थे और मोदी के दौर में बिकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों को एक पत्र लिखकर उनकी मांगों का समर्थन करने का ऐलान किया है।

निजी हाथों में जाते ही खत्म होगा आरक्षण -राहुल गांधी

आईडीबीआई बैंक परिवार के कर्मचारियों को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बैंक की नियंत्रक हिस्सेदारी कनाडाई निवेश फर्म फेयरफैक्स को बेचने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही इस बैंक का निजीकरण पूरा होगा, इसमें काम करने वाले और भविष्य में भर्ती होने वाले अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थियों के लिए मिलने वाला संवैधानिक आरक्षण समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले से ही कमजोर की जा चुकीं कर्मचारियों की सेवा शर्तें निजी नियंत्रण में जाने के बाद अपनी अंतिम सुरक्षा भी खो देंगी।

9,000 करोड़ का मुनाफा कमाने वाले बैंक की बिक्री पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने बताया कि पिछले साल मार्च में संसद भवन में बैंक कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्या बताई थी। कर्मचारियों का सवाल था कि जिस बैंक को उन्होंने दिन-रात मेहनत करके घाटे से उबारा और रिकॉर्ड मुनाफे में पहुंचाया, सरकार उसे क्यों बेच रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सात साल पहले तक घाटे से जूझ रहा आईडीबीआई बैंक पिछले वित्त वर्ष में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा चुका है। यह शानदार बदलाव पूरी तरह बैंक कर्मचारियों के परिश्रम का परिणाम है।

राहुल गांधी ने याद दिलाया कि उन्होंने इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाया था कि एक लाभ कमाने वाले सार्वजनिक वित्तीय संस्थान को बेचने के पीछे क्या तर्क है और खाताधारकों व कर्मियों के हितों की रक्षा कैसे होगी, लेकिन सरकार ने इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया।

सरकार और LIC की हिस्सेदारी घटकर 34% रह जाएगी

सार्वजनिक संपत्तियों के मालिकाना हक का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनी किसी भी संस्था पर देश के लोगों का प्राथमिक अधिकार होता है। फिलहाल IDBI बैंक में भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) की कुल हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है। प्रस्तावित बिक्री के बाद यह हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 34 प्रतिशत रह जाएगी, जिससे बैंक का सार्वजनिक स्वरूप पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

राहुल गांधी ने 2003 में संसद में सरकार द्वारा दी गई उस गारंटी को भी याद दिलाया, जिसमें भरोसा दिया गया था कि IDBI में सरकार की हिस्सेदारी कभी भी 51 प्रतिशत से कम नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संसद में दिया गया आश्वासन असल में देश की जनता से किया गया एक वादा है, जिसे सरकार यूं ही नजरअंदाज नहीं कर सकती।

राहुल गांधी ने कर्मचारियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने में विश्वास रखती है और कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी है।

Updated on:
30 Oct 2026, 10:37 AM IST
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