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‘राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बने रहने के लायक नहीं’, प्रशांत भूषण की टिप्पणी पर बीजेपी प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने साधा कांग्रेस सांसद पर निशाना

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। क्या कहा केशवन ने? आइए नज़र डालते हैं।
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Oct 15, 2026
C.R. Kesavan
सी.आर. केशवन (Photo - ANI)

बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन (C.R. Kesavan) ने आज कांग्रेस (Congress) पार्टी पर भारतीय लोकतंत्र को पटरी से उतारने के लिए एक अराजक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहने के लिए लायक नहीं बताते हुए उन्हें राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताया। केशवन ने कहा कि राहुल की भीड़तंत्र वाली राजनीति का सच प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) की आज ही की गई सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी से सबके सामने आ गया है।

"राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बने रहने के लायक नहीं"

प्रशांत भूषण की टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए केशवन ने लिखा, "सत्ता परिवर्तन को लेकर प्रशांत भूषण की जहरीली बयानबाजी ने अब यह पूरी तरह साबित कर दिया है कि SIR प्रक्रिया राहुल गांधी और उनके घिनौने इकोसिस्टम के लिए महज एक दिखावा थी। उनका असली मक़सद और अराजक एजेंडा हमेशा से भारतीय लोकतंत्र को पटरी से उतारना और अलोकतांत्रिक तरीके से सत्ता हथियाना रहा है। राहुल गांधी के आचरण को लेकर उन्हें जो नोटिस जारी किया गया है, वह उनकी भीड़तंत्र वाली राजनीति पर एक करारा तमाचा है। गैर-ज़िम्मेदार और राष्ट्र-विरोधी राहुल गांधी राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा हैं और वह नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहने के लायक नहीं हैं।"

क्या कहा भूषण ने?

सीनियर एडवोकेट भूषण ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए देश में सत्ता परिवर्तन की मांग की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश में चुनावी लोकतंत्र को कुचलने पर आमादा है। भूषण ने कहा, "यह सरकार बार-बार कहती है कि यह आंदोलन विपक्ष द्वारा सत्ता परिवर्तन की कोशिश है। हम तो बस देश में चुनावी लोकतंत्र को बचाने की अपील कर रहे हैं। अगर ऐसी बर्बरता जारी रही, तो सत्ता परिवर्तन ज़रूर होगा। हम सभी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। क्या इसमें कुछ गलत है? सत्ता परिवर्तन हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करना कोई अपराध नहीं है। ऐसी सरकार नहीं चल सकती, जो देश में चुनावी लोकतंत्र को कुचलने पर तुली हो और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करती रहे।"