Weather Update: देश के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ रही है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। पढ़ें पूरी खबर...
IMD Alert: मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत में 14 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना जताई है। इसके प्रभाव से 14 से 16 मार्च तक हिमालयी रेंज के जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल व उत्तराखंड और उत्तर भारत के राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार तथा पूर्वोत्तर के राज्यों के अलग-अलग क्षेत्रों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने 14 से 16 मार्च तक अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम बदलने के साथ ही 14 मार्च से राजस्थान व दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को अधिकतम तापमान में आंशिक गिरावट की संभावना है।
आइएमडी ने बुधवार को विशेष बुलेटिन जारी गुजरात राज्य में तीव्र भीषण लू चलने चेतावनी दी। यह स्थिति 13 मार्च तक बनी रहेगी। रातें भी गर्म रहने की संभावना है। उसके बाद गर्मी का असर धीरे-धीरे कम होगा। बुधवार को गुजरात क्षेत्र में कई स्थानों में भीषण लू और पश्चिम राजस्थान में लू का असर रहा। पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के कई क्षेत्रों का तापमान 38 से 42 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में 12 मार्च को कई स्थानों पर हीटवेव से लेकर गंभीर हीटवेव की संभावना है।
प्रशांत महासागर में नमक के प्रभाव से अल नीनो मजबूत हो सकता है और इसका प्रभाव भारत के आगामी मानसून पर पड़ सकता है। प्रशांत महासागर में नमक के पैटर्न पर किए गए नए शोध में भारत में मानसून के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित ड्यूक यूनिवर्सिटी के निकोलस स्कूल ऑफ द एनवायरनमेंट में बताया गया है कि प्रशांत महासागर में खारेपन का खास पैटर्न अल नीनो की तीव्रता को लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं और अत्यधिक अल नीनो घटनाओं को दोगुना कर सकते हैं। इससे भारत में मानसून कमजोर हो सकता है, सूखा पड़ सकता है और जल संकट गहरा सकता है।
शोध में 65 वर्षों के महासागरीय डेटा और क्लाइमेट मॉडल्स का उपयोग किया गया है। शोधकर्ता शिनेंग हु ने कहा कि महासागरीय धाराएं नमकीन या मीठे पानी को इधर-उधर ले जाती हैं और नमक के वितरण को बदलती हैं। नमक की धाराएं अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं को प्रभावित कर सकती है। भूमध्यरेखीय पश्चिमी प्रशांत में मीठा पानी और दूर-दूर नमकीन पानी गर्म सतही पानी को पूर्व की ओर धकेलता है, जिससे अल नीनो ट्रिगर और मजबूत होता है। वर्ष 2018 के बाद 2023 का अल नीनो रिकॉर्ड में सबसे मजबूत में से एक था। जिससे मानसून कमजोर रहा और फसलें प्रभावित हुईं। भारत पहले से ही अनियमित मौसम, लंबी गर्मी की लहरें, पानी की कमी और कृषि पर दबाव झेल रहा है। अल नीनो के संभावित ताजा संकेत से देश सामने नई चुनौती आ सकती है।