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इंडिया एनर्जी वीक: दुनियाभर के विशेषज्ञ बोले, अब क्षमता नहीं, दक्षता बनेगी अक्षय ऊर्जा की असली ताकत

क्लीन एनर्जी का भविष्य अब केवल उत्पादन नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता पर टिका है। जानें राजस्थान कैसे 1.25 लाख मेगावाट के लक्ष्य के साथ भारत की अक्षय ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व कर रहा है और क्यों ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा 'गेम चेंजर'।
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Jan 31, 2026
Renewable Energy
विशेषज्ञों के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यही चुनौती भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन की मांग को और बढ़ाएगी। (Photo - IANS)

क्लीन और ग्रीन एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) का भविष्य अब केवल अधिक बिजली उत्पादन पर नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षता ही वह ‘एक्स-फैक्टर’ है, जो नवीकरणीय ऊर्जा को सस्ती, भरोसेमंद और उपभोक्ताओं के लिए अधिक उपयोगी बनाएगा।

गोवा के पणजी में इंडिया एनर्जी वीक के दौरान आयोजित एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा में ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में बिजली उत्पादन की लागत करीब एक-तिहाई तक घट चुकी है, जबकि बिजली संयंत्रों की कार्यक्षमता (लोड फैक्टर) दोगुनी से अधिक हो गई है। पूरी वैल्यू चेन में सुधार के चलते बिजली आपूर्ति की क्षमता भी लगभग तीन गुना बढ़ी है।

इन हालात में राजस्थान पर विशेष रूप से नजरें टिकी हैं, क्योंकि देश की सबसे अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता इसी राज्य में स्थापित है। वर्तमान में राजस्थान में करीब 42,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है, जिसे अगले चार वर्षों में बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। अब राज्य के सामने चुनौती यह है कि उत्पादित बिजली का अधिक कुशल उपयोग कैसे हो, ताकि उपभोक्ताओं को नियमित और कम दरों पर बिजली मिल सके।

नियमित उपलब्धता बनी बड़ी चुनौती..

विशेषज्ञों के अनुसार सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यही चुनौती भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन की मांग को और बढ़ाएगी। ऊर्जा विशेषज्ञ मोलॉय बनर्जी का मानना है कि हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण और स्थिर बिजली आपूर्ति का प्रभावी विकल्प बन सकता है।

राजस्थान की निर्णायक भूमिका

देश में तेजी से बढ़ रही सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में राजस्थान की भूमिका सबसे अहम है। पर्याप्त भूमि, उच्च सोलर रेडिएशन और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क के कारण राजस्थान पहले ही सोलर एनर्जी का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

फैक्ट फाइल

  • भारत में 210 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित
  • राजस्थान का हिस्सा करीब 42 गीगावाट
  • देश में कुल भूमि का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा परियोजनाओं में उपयोग
  • राजस्थान में अक्षय ऊर्जा क्षमता को 125 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य
Updated on:
31 Jan 2026 02:46 am
Published on:
31 Jan 2026 02:45 am