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MP Politics: पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बड़ा झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से किया इनकार

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है।
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Jul 10, 2026
Rajendra Bharti
दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती

Rajendra Bharti Cheating Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी है। यह मामला 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़ा कर गलत तरीके से ब्याज की रकम हासिल करने से जुड़ा है। इसी मामले में राजेंद्र भारती को पहले दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उनके खिलाफ दिया गया फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा। जस्टिस मनोज जैन ने याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने सुनाई थी 3 साल की सजा

आपको बता दें कि एक अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने 1998 के बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में राजेंद्र भारती को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था। दो अप्रैल को कोर्ट ने भारती को तीन साल की जेल और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा के तुरंत बाद उन्हें जमानत मिल गई थी और उच्च न्यायालय में अपील दायर करने के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया था।

निचली अदालत ने दिया था दोषी करार

निचली अदालत ने राजेंद्र भारती को आईपीसी की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दोषी करार दिया था।

विधानसभा सदस्यता नहीं बचा पाए

विधानसभा सदस्यता खत्म किए जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर भारती दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे। तीन महीने तक चले इस मामले में 8 और 9 जुलाई को सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने 10 जुलाई को उनकी याचिका खारिज कर दी।

जानें क्या था पूरा मामला

अभियोजन के अनुसार, राजेंद्र भारती की दिवंगत मां सावित्री ने 24 अगस्त 1998 को दतिया के जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में परिवार के ट्रस्ट के नाम पर 10 लाख रुपये की 3 साल की सावधि जमा (FD) कराई थी। इस पर 13.5 प्रतिशत सालाना ब्याज तय हुआ था। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर तय अवधि खत्म होने के बाद भी ऊंची ब्याज दर जारी रखी। इससे बैंक को नुकसान पहुंचाया गया और आरोपी खुद फायदा उठाते रहे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह साजिश रचकर लंबे समय तक अनियमित भुगतान किया जाता रहा।

Updated on:
10 Jul 2026 06:54 pm
Published on:
10 Jul 2026 05:31 pm