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Sanatan Hindu Dharma: भगवा रंग पर पुराने बयान से फिर भड़के राम कदम, दिग्विजय सिंह को सनातन धर्म पर बोलने से बचने की दी नसीहत

Maharashtra Politics: भगवा केवल एक रंग नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और धार्मिक परंपरा से जुड़ा प्रतीक है। राम कदम के ताजा बयान ने इसी मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस में ला खड़ा किया है। क्या पुराने विवादों का असर आज भी नेताओं की छवि और राजनीतिक संवाद पर पड़ रहा है? यही सवाल इस पूरे घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाता है।
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Updated: 6 Nov 2026, 11:14 AM IST
Sanatan Hindu Dharm
Sanatan Hindu Dharm : दिग्विजय सिंह के पुराने बयान पर महाराष्ट्र में नया बवाल, राम कदम ने धर्म (फोटो सोर्स: ANI)

Digvijay Singh Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में धार्मिक मुद्दे को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक राम कदम ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उनके पुराने विवादित बयानों को लेकर सवाल उठाए हैं। कदम का कहना है कि सनातन हिंदू धर्म और भगवा रंग जैसे धार्मिक प्रतीकों पर टिप्पणी करने से पहले सिंह को अपनी पिछली बयानबाजी पर विचार करना चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर वैचारिक टकराव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Digvijay Singh Controversy: राम कदम ने पुराने बयानों को बनाया निशाना

मुंबई में भाजपा विधायक राम कदम ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सिंह को सनातन हिंदू धर्म के विषय में बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार कांग्रेस नेता पहले भी कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं, जिनसे विवाद खड़ा हुआ है।

कदम ने अपनी प्रतिक्रिया में सिंह की उम्र का भी उल्लेख किया और कहा कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनके बयान लगातार विवादों में रहते हैं। भाजपा विधायक ने इस पूरे मामले को धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कांग्रेस नेता की राजनीतिक भाषा पर सवाल उठाए।

भगवा रंग को लेकर क्यों उठाया सवाल?

राम कदम के बयान का सबसे अहम हिस्सा भगवा रंग से जुड़ा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने पहले भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़कर टिप्पणी की थी।

भाजपा विधायक ने कहा कि भगवा रंग हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। साधु-संतों और ऋषियों की वेशभूषा में इसका इस्तेमाल आध्यात्मिक जीवन, त्याग और धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में इस रंग को आतंकवाद से जोड़ना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला हो सकता है।

हालांकि, उपलब्ध बयान में दिग्विजय सिंह की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इस मुद्दे पर दोनों पक्षों का पूरा पक्ष सामने आना जरूरी है।

धार्मिक प्रतीकों पर राजनीति का पुराना विवाद

भारतीय राजनीति में धर्म, धार्मिक पहचान और प्रतीकों को लेकर बहस नई नहीं है। भगवा रंग लंबे समय से धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा रहा है।

एक ओर भाजपा और उसके नेता भगवा को हिंदू संस्कृति तथा धार्मिक आस्था का प्रतीक बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेता धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठाते रहे हैं।

ऐसे मामलों में किसी नेता की टिप्पणी का संदर्भ, उसका पूरा बयान और उस पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है। अधूरी जानकारी के आधार पर किसी टिप्पणी का अर्थ निकालना राजनीतिक विवाद को और बढ़ा सकता है।

बयान से फिर आमने-सामने आए राजनीतिक विचार

राम कदम की टिप्पणी ने एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक मतभेदों को उजागर किया है। भाजपा विधायक ने जहां धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर कांग्रेस नेता को घेरा, वहीं इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बयानबाजी में मर्यादा और जिम्मेदारी की जरूरत पर भी सवाल खड़े किए हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में राम कदम का बयान ही सामने आया है। दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया और इस विवाद पर आगे होने वाली राजनीतिक गतिविधियों से तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

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6 Nov 2026, 11:14 AM IST
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