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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कोषाध्यक्ष चुप और उन पर चुप्पी क्यों? उठ रहे कई और सवाल

Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना में अब तक जो कुछ हुआ है, उससे सवालों के जवाब मिलने से ज्यादा और सवाल खड़े हो रहे हैं। कोषाध्यक्ष की चुप्पी और उन पर छाई खामोशी भी कई सवाल पैदा कर रही है।
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Updated: 27 Jun 2026, 12:48 PM IST
Ram Mandir Donation Theft News
अयोध्या के राम मंदिर के अंदर का नजारा। (फोटो : ANI)

अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों ने जो दान दिया, उसमें गबन हुआ है। गबन की रकम कितनी है, यह आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है। लेकिन, इतना जरूर कहा गया है कि 79.85 लाख रुपये बरामद कर लिए गए हैं। गबन की बात सामने आने पर एफ़आईआर नहीं कराई गई, विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले बना दिया गया। इस पर हर ओर से सवाल उठने के बाद एफ़आईआर हुई, जिसमें आठ लोगों को नामजद किया गया। ये लोग फिलहाल सोमवार तक न्यायिक हिरासत में हैं।

इस बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। दोनों के करीबियों के चढ़ावा चोरी में शामिल होने के आरोप हैं। विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि जरूरी हुआ तो चंपत राय से भी पूछताछ की जाएगी। लेकिन, इस सब के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं। इन सवालों पर नजर डालते हैं।

सवाल 1: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की कहीं नहीं हो रही चर्चा?

पूरे विवाद में एक व्यक्ति की कहीं चर्चा नहीं हो रही है। वह हैं स्वामी गोविंद देव गिरी। गिरी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं। इस नाते कोष की सुरक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी उन्हीं की बनती है।

ऐसी अपुष्ट खबरें आ रही हैं कि दान की गिनती में लगे लोग निजी खाते में पैसा जमा करा रहे थे। इस सब के बावजूद वह पूरी तरह खामोश हैं और उनके नाम पर भी खामोशी है। इस चुप्पी के खिलाफ कुछ लोग आवाज उठा रहे हैं, लेकिन स्वामी गिरी या ट्रस्ट की ओर से कुछ नहीं कहा जा रहा है।

स्वामी गोविन्द देव गिरी इस सप्ताह भीलवाड़ा में हर व्यक्ति को चार बच्चे पैदा करने की जरूरत बता रहे थे। पत्रकारों ने जब उनसे दान की चोरी पर सवाल पूछा तो उन्होंने सवाल टाल दिया।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कौन क्या हैं?

नामट्रस्ट में पदभूमिका इनके बारे में
महंत नृत्यगोपाल दास अध्यक्ष (President)ट्रस्ट के सर्वोच्च मार्गदर्शक।अयोध्या के सबसे बड़े मंदिर 'मार्कंडेय आश्रम' और मणिराम दास की छावनी के प्रमुख हैं। वे राम जन्मभूमि न्यास के भी अध्यक्ष रहे हैं।
चम्पत रायमहासचिव (General Secretary), जिन्होंने 26 जून को इस्तीफा दिया है। निर्माण कार्यों का मुख्य समन्वय।वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। राम मंदिर आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण उन्हें मंदिर के भूमि और कानूनी मामलों का गहरा अनुभव है।
स्वामी गोविन्द देव गिरी कोषाध्यक्ष (Treasurer)वित्तीय प्रबंधन और दान खातों की देखरेख।महाराष्ट्र के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु हैं। वे 'महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान' के संस्थापक हैं और उन्हें शास्त्रों, वेद-वेदांग तथा वित्तीय पारदर्शिता का विशेषज्ञ माना जाता है।
नृपेंद्र मिश्रअध्यक्ष - भवन निर्माण समितिमंदिर के भौतिक और तकनीकी निर्माण का प्रबंधन।उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। वे भारत के प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव (Principal Secretary) के रूप में कार्य कर चुके हैं।
पद्मश्री श्री के. परासरणसंस्थापक ट्रस्टी सदस्यकानूनी मामलों में वरिष्ठतम सलाहकार।भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल (महान्यायवादी) और देश के सबसे प्रतिष्ठित वयोवृद्ध वकीलों में से एक हैं। सुप्रीम कोर्ट में राम लला विराजमान की तरफ से मुख्य पैरवी उन्होंने ही की थी।
स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराजसदस्य (Trustee)आध्यात्मिक और धार्मिक मामलों में मार्गदर्शन।वे प्रयागराज (इलाहाबाद) स्थित ज्योतिष्पीठ के पूर्व शंकराचार्य हैं ।
स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराजसदस्य (Trustee)सामाजिक और धार्मिक समरसता का कार्य।दक्षिण भारत के प्रसिद्ध उडुपी पेजावर मठ (कर्नाटक) के 33वें पीठाधीश।
परमानंद गिरी सदस्य (Trustee)नैतिक और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार।हरिद्वार स्थित 'अखंड परमधाम' के प्रमुख। दर्जनों आध्यात्मिक और सामाजिक संस्थाओं के संचालक। वेदांत के प्रखर ज्ञाता।
महंत दिनेन्द्र दास सदस्य (Trustee)निर्मोही अखाड़े के मुख्य प्रतिनिधि।अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के प्रमुख (महंत)। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के निर्देशानुसार इस प्राचीन अखाड़े को प्रतिनिधित्व देने के लिए इन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया।
डॉ. अनिल मिश्रसदस्य (Trustee)। इन्होंने भी 26 जून को इस्तीफा दे दिया है। स्थानीय प्रशासनिक व सामाजिक तालमेल।अयोध्या के नामी होम्योपैथिक डॉक्टर। लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ाव।
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रसदस्य (Trustee)इन्हें 'अयोध्या के राजा' (रामायण काल के राजवंश के वंशज) के रूप में जाना जाता है। वे अयोध्या के पूर्व शाही परिवार से हैं और रामायण मेला समिति के संरक्षक भी हैं।
कामेश्वर चौपालसदस्य (Trustee)बिहार के रहने वाले दलित समुदाय के एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता। इन्होंने ही 9 नवंबर 1989 को अयोध्या में राम मंदिर की पहली 'शिलान्यास ईंट' रखी थी।
प्रशांत लोखंडे, आई.ए.एस.केंद्र सरकार के प्रतिनिधि (पदेन सदस्य)केंद्र सरकार और ट्रस्ट के बीच प्रशासनिक कड़ी।केंद्र सरकार द्वारा नामित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी।
संजय प्रसाद, आई.ए.एस.राज्य सरकार के प्रतिनिधि (पदेन सदस्य)उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय विकास का समन्वय।उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और गृह विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका निभा चुके हैं। फिलहाल सीएम के अपर मुख्य सचिव हैं।
शशांक त्रिपाठी, आई.ए.एस.पदेन सदस्यअयोध्या में कानून-व्यवस्था और दर्शनार्थी सुविधाएं।भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी। वर्तमान में अयोध्या के जिलाधिकारी। सुरक्षा, भूमि आवंटन और सरकारी लॉजिस्टिक्स का जिम्मा संभालते हैं।

सवाल 2: देरी से हुई FIR में रकम को कोई जिक्र क्यों नहीं? ट्रस्ट का कोई व्यक्ति क्यों नहीं?

दान में गबन की एफआईआर एक तो देर से कराई गई। उसमें भी न तो गबन की कोई अनुमानित रकम बताई गई और न ही ट्रस्ट में शामिल किसी व्यक्ति का नाम लिया गया। क्या ट्रस्ट के किसी व्यक्ति की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती है?

क्र.सं.नामसंक्षिप्त विवरण
अविनाश शुक्लाचढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में शामिल
2अनुकल्प मिश्राअनिल मिश्रा का रिश्तेदार और सह-आरोपी लवकुश मिश्रा का रिश्तेदार।
3लवकुश मिश्राअनिल मिश्रा के संबंधी।
4मनीष कुमार यादव (टिन्नू यादव)चंपत राय का ड्राइवर। बताते हैं कि वह 2022 से ही मंदिर के अंदरूनी कामों में शामिल रहता था।
5कल्पेश पाण्डेयचढ़ावे की गिनती करने वाला कर्मी।
6रमा शंकर मिश्रादान प्रबंधन और गिनती में शामिल।
7सुभाष श्रीवास्तवबैंक से रिटायर कर्मचारी। दान की गिनती करने वाले कमरे में शिफ्ट की ज़िम्मेदारी संभालता था।
8रामेश्वर यादव उर्फ टिंकूएफ़आईआर में नामित व्यक्ति।
9अन्य अज्ञात निवासीगणअन्य 4 अज्ञात व्यक्ति जो जांच के दायरे में हैं।

सवाल 3: एफ़आईआर से पहले ही एसआईटी क्यों? एसआईटी जांच के बाद उसके आधार पर एफ़आईआर क्यों नहीं?

एफ़आईआर से पहले सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) बना दी। इसमें तीन अफसर रखे गए। विजय विश्वास पंत (लखनऊ के मण्डल आयुक्त), किरण एस (लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक, यानि आईजी) और नील रतन (वित्त विभाग में विशेष सचिव)। इन्होंने शुरुआती जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी। संजय प्रसाद ट्रस्ट के सदस्य और सरकार के बड़े अफसर हैं।

जब गड़बड़ का पता चला तो एफ़आईआर उसी समय होनी चाहिए थी। पहले जांच करा ली और फिर एफ़आईआर हुई। उस जांच में क्या निकला, यह छुपाने की क्या जरूरत है? उस जांच के निष्कर्षों को एफ़आईआर में शामिल कराया गया या एफ़आईआर का आधार बनाया गया?

सवाल चार: क्या सरकार और ट्रस्ट भक्तों की आस्था से खिलवाड़ नहीं कर रहे?

यह तो पक्का है कि गबन हुआ। कितना हुआ, कैसे हुआ, किसने किया, किसकी क्या भूमिका रही जैसे सवालों का जवाब मिलना बाकी है। पर सरकार और ट्रस्ट के अब तक के रवैये से लगता है कि वह भक्तों को इस बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं बताना चाहते। पारदर्शिता का अभाव साफ दिखता है। क्या यह रामभक्तों की आस्था से दोहरा खिलवाड़ नहीं है?

सवाल पांच: मंदिरों में दान देने और इनके प्रबंधन की व्यवस्था पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है?

क्या मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों में नकद दान देने की व्यवस्था बंद कर दी जानी चाहिए? क्या जिन धार्मिक स्थलों पर दान की रकम बहुत ज्यादा होती है, वहां की आर्थिक व्यवस्था सरकार को अपने हाथ में लेनी चाहिए? क्या राम मंदिर के लिए बना ट्रस्ट आर्थिक प्रबंधन के लिए सही तरीका नहीं अपना पाई? क्या ट्रस्ट की जगह कोई कॉर्पोरेट व्यवस्था बननी चाहिए? जैसा कि नृपेंद्र मिश्रा ने कहा भी कि मंदिर प्रबंधन के लिए एक सीईओ होना चाहिए।

dधारा

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27 Jun 2026, 12:48 PM IST
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