
अयोध्या में राम मंदिर और चंपत राय (फोटो - आईएएनएस)
Ram Mandir Donation Row: अयोध्या में राम मंदिर के लिए नींव पूजन 5 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हुआ था। महंत नृत्य गोपाल दास ने इसके लिए 40 किलो की चांदी की ईंट दान दी थी। उस समय इसकी कीमत करीब 26 लाख रुपये थी। इसे प्रतीक के तौर पर नींव पूजन में रखा गया और बाद में हटा कर बैंक के लॉकर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया था।
गोपाल दास अयोध्या के सबसे बड़े मंदिर मणिराम दास की छावनी के मुख्य पुजारी हुआ करते थे और 2003 से राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष भी थे। यह न्यास (ट्रस्ट) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद उस जगह मंदिर बनवाने के उद्देश्य से बनाया था। हालांकि, 9 नवंबर, 2019 को जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मसले पर फैसला दिया तो सरकार से तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाने के लिए भी कहा। इसी ट्रस्ट को मंदिर निर्माण कराना था। तब सरकार ने 5 फरवरी, 2020 को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम से ट्रस्ट बनाया। इस ट्रस्ट से नृत्य गोपाल दास को बाहर रखा गया था। इस पर उन्होंने आंदोलन की धमकी दे डाली। तब 19 फरवरी को ट्रस्ट की पहली ही बैठक में उन्हें इसका अध्यक्ष चुना गया।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को मंदिर बनाने के लिए पैसे की कोई कमी नहीं रही। मोदी सरकार ने भी पांच फरवरी (2020) को एक रुपये का सांकेतिक चंदा दिया था। इसके बाद ट्रस्ट का चंदा जुटाने का अभियान औपचारिक रूप से शुरू हुआ था। ट्रस्ट ने खुला ऐलान किया था उसे किसी भी रूप में चंदा दिया जा सकता है, नकद और संपत्ति के रूप में भी। अगस्त तक में ही ट्रस्ट के बैंक खाते में 42 करोड़ रुपये आ गए थे। मार्च 2023 तक यह रकम 3500 करोड़ पहुंच चुकी थी। तब तक खर्च की गई रकम 900 करोड़ रुपये ही थी। अक्टूबर में इसे विदेश से भी चंदा लेने का लाइसेंस मिल गया।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद इसकी पूरी प्रशासनिक जिम्मेदारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के हाथों में रही। मंदिर निर्माण, निधि समर्पण अभियान, दान की व्यवस्था और ट्रस्ट की ओर से होने वाली लगभग हर आधिकारिक जानकारी मीडिया तक पहुंचाने का काम भी वही करते रहे। यही वजह है कि जब भी राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ा कोई विवाद सामने आता है तो सबसे पहले सवाल चंपत राय की भूमिका पर उठते हैं।
हाल के दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद यह विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दल लगातार ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान राशि के हिसाब-किताब पर सवाल उठा रहे थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इनमें सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में ट्रस्ट से जुड़े रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम भी शामिल है जिसे चंपत राय का ड्राइवर और करीबी सहयोगी बताया जाता है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की रकम के कथित दुरुपयोग में उसकी अहम भूमिका थी। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।
इसी घटनाक्रम के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे की खबर सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले ने नया राजनीतिक और सार्वजनिक आयाम ले लिया। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से पहले भी कहा जाता रहा है कि दान राशि का पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से रखा जाता है और सभी वित्तीय लेन-देन बैंकिंग माध्यमों से किए जाते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब चंपत राय विवादों में आए हों। जून 2021 में भी राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में खरीदी गई जमीन के सौदे को लेकर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय भी चंपत राय ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ट्रस्ट ने सभी जमीनें नियमों के तहत और बाजार भाव से कम कीमत पर खरीदी हैं तथा पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया था।
करीब चार दशक तक राम जन्मभूमि आंदोलन की रणनीति तैयार करने वाले चंपत राय को विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में गिना जाता रहा है। आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक उनकी भूमिका बेहद अहम रही लेकिन अब राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद ने उनकी छवि और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली दोनों को नए सिरे से सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
Updated on:
26 Jun 2026 07:16 pm
Published on:
26 Jun 2026 06:14 pm
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