
लोकसभा में CJP प्रदर्शनों से जुड़े सवाल खारिज किए जाने पर उठे सवाल (फोटो सोर्स- IANS)
Parliament Session: लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच संवाद का सबसे बड़ा मंच संसद होता है। लेकिन हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा सत्र में युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर पूछे गए सवालों को खारिज किए जाने से एक नई बहस छिड़ गई है। संसद की प्रश्नकाल प्रणाली पर उठे इन सवालों ने कार्यपालिका की जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर कई गंभीर मुद्दे खड़े कर दिए हैं।
लोकसभा सांसद मैथेश्वरन वी.एस. ने नोटिस संदर्भ संख्या 101799 और 101801 के जरिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा था। इन नोटिसों के तहत देश के युवाओं से जुड़े 6 प्रमुख बिंदुओं पर सरकार का रुख स्पष्ट करने की मांग की गई थी-
इन सभी गंभीर मुद्दों पर पूछे गए सवालों को लोकसभा के नियम 41(2) के अलग-अलग उप-खंडों का हवाला देकर खारिज कर दिया गया। सवाल उठाने वाले नेताओं का कहना है कि जब ये मुद्दे सीधे जनता से जुड़े हैं, तो इन्हें इस तरह तकनीकी कारणों से खारिज करना सही नहीं है।
सदन के अंदर विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा गरमाया रहा। आलोचकों का कहना है कि महत्वपूर्ण हफ्तों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खुद संसद में आकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर स्थिति साफ करनी चाहिए थी। गृह मंत्रालय से सीधे जुड़े इन मामलों पर सरकार का पक्ष सामने न आना कई सवाल खड़े करता है।
संसदीय लोकतंत्र में प्रश्नकाल केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाए रखने का मुख्य जरिया है। जब शक्तियों का इस्तेमाल करने वाली कार्यपालिका से संसद के अंदर सवाल पूछने के दरवाजे बंद होते हैं, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत माना जाता है। यदि युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर सदन में चर्चा नहीं होगी, तो यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बहुत ही चिंताजनक है।
Updated on:
16 Aug 2026 01:43 pm
Published on:
16 Aug 2026 01:38 pm
