
पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के लिए पूरा टाइमलाइन सेट हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में आज बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कहा है कि यूसीसी बंगाल में हर हाल में लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। इस समिति में कानून के जानकार, शिक्षाविद और दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
इससे पहले जस्टिस देसाई उत्तराखंड और राजस्थान में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार कर चुकी हैं। उन्होंने उत्तराखंड में यूसीसी कमेटी की अगुवाई की थी। वहीं, राजस्थान सरकार ने भी उन्हें यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई गई कमेटी का प्रमुख बनाया था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति को यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सिर्फ एक महीने का समय दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद अगस्त में विधानसभा में बिल पेश किया जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि 2 जुलाई को यूसीसी का ड्राफ्ट कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अगस्त सत्र में इसे सदन में पेश कर दिया जाएगा। सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है और कोई भी रुकावट आने पर भी पीछे नहीं हटेगी।
शुभेंदु सरकार का दावा है कि UCC लाकर महिलाओं को समान अधिकार दिए जाएंगे। खासकर तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार और शादी जैसे मुद्दों पर एक समान कानून से समाज में लंबे समय से चली आ रही असमानताएं खत्म होंगी।
कई सामाजिक संगठन और महिला अधिकार कार्यकर्ता इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। हालांकि कुछ विपक्षी दलों और धर्मगुरुओं का कहना है कि यह कदम सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है।
बंगाल में यूसीसी की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। कई राज्यों में यूसीसी लागू होने या उसकी प्रक्रिया शुरू होने के बाद पश्चिम बंगाल में भी इसकी मांग तेज हुई।
मुख्यमंत्री ने सदन में जोर देकर कहा कि यूसीसी बंगाल की महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों के हित में है। यह कोई सियासी चाल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का मुद्दा है।