गुजरात निकाय चुनाव में बीजेपी ने 15 में से 10 नगर निगमों पर जीत दर्ज कर दबदबा कायम रखा। सूरत में बड़ी जीत मिली, जबकि कांग्रेस कई जगह कमजोर रही। राजकोट में रविंद्र जडेजा की बहन नयनाबा जडेजा को हार का सामना करना पड़ा, जिससे मुकाबला चर्चा में रहा।
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं और एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना मजबूत जनाधार दिखाया है। राज्य के 15 नगर निगमों में से 10 पर बीजेपी ने साफ बहुमत हासिल कर लिया है। कई जगहों पर मुकाबला दिलचस्प रहा, लेकिन अंत में बाजी बीजेपी के पक्ष में जाती दिखी। इस चुनाव की एक खास बात यह रही कि कुछ नई नगरपालिकाओं, मेहसाणा, मोरबी और नडियाद में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई।
हालांकि, चुनाव सिर्फ पार्टियों के बीच की लड़ाई तक सीमित नहीं रहा। राजकोट की एक सीट ने इसे थोड़ा निजी रंग भी दे दिया। यहां भारतीय क्रिकेटर रविंद्र जडेजा(Ravindra Jadeja) की बहन नयनाबा जडेजा कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थीं। उनकी उम्मीदवारी ने शुरुआत में काफी चर्चा बटोरी, लेकिन नतीजों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राजकोट के वार्ड नंबर 2 में नयनाबा को बीजेपी उम्मीदवार के सामने टिक पाना मुश्किल हुआ। चुनाव के दौरान उनकी पहचान और लोकप्रियता को कांग्रेस के लिए मजबूत फैक्टर माना जा रहा था, लेकिन वोटिंग के दिन समीकरण बदल गए। इस सीट पर मुकाबला कहीं न कहीं परिवार और राजनीति के बीच टकराव की कहानी बन गया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा।
अगर सूरत की बात करें तो वहां बीजेपी ने लगभग क्लीन स्वीप कर दिया। 120 सीटों वाले नगर निगम में पार्टी ने 115 सीटें जीत लीं। आम आदमी पार्टी (AAP), जिसने पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था, इस बार सिर्फ 4 सीटों तक सिमट गई। वहीं कांग्रेस को यहां केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा। भुज नगर पालिका में भी एक अलग तस्वीर देखने को मिली, जहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के तीन उम्मीदवार जीतने में सफल रहे।
इस बार चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी भी अच्छी रही। 26 अप्रैल को हुए मतदान में 4 करोड़ 18 लाख से ज्यादा लोगों ने वोट डाले। नगर निगमों में करीब 55 फीसदी मतदान हुआ, जबकि नगरपालिकाओं, जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों में यह आंकड़ा 65 से 67 फीसदी के बीच रहा।